संसदीय कार्यमंत्री के बयान पर उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों में आक्रोश, की इस्तीफे की मांग
देहरादून।उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच ने 22 फरवरी को दोपहर 12 बजे शहीद स्मारक पर एक आक्रोश और भर्त्सना बैठक आयोजित की। यह बैठक विधानसभा सत्र में संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा कथित रूप से अनुचित बयान देने और सदन की गरिमा भंग करने के विरोध में आयोजित की गई। बैठक में उपस्थित आंदोलनकारियों ने एक स्वर में मंत्री के बयान की कड़ी निंदा की और उनके इस्तीफे की मांग उठाई।
वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी रामपाल, पुष्पलता सिलमाणा और केशव उनियाल ने कहा कि प्रेमचंद अग्रवाल ने न केवल विधानसभा पीठ का अपमान किया, बल्कि पूरे उत्तराखंडी समाज का भी अपमान करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विधानसभा अध्यक्ष ने संसदीय कार्यमंत्री के इस कृत्य पर कोई कार्रवाई नहीं की।
शकुंतला रावत, सुलोचना भट्ट और प्रेम सिंह नेगी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रेमचंद अग्रवाल की इस हरकत पर कोई सख्त कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से अन्य विधायक और मंत्री इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं, वह बेहद चिंताजनक है।
प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती, हरी प्रकाश शर्मा और लोक बहादुर थापा ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि एक तरफ सरकार राज्य की रजत जयंती मनाने की तैयारी कर रही है, तो दूसरी तरफ विधानसभा में उत्तराखंड की अस्मिता को ठेस पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि UCC कानून के बाद पहले ही प्रदेश में असंतोष का माहौल था, और अब विधानसभा में मर्यादा का उल्लंघन कर उत्तराखंडियत को अपमानित किया जा रहा है।
बैठक के अंत में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च किया। आंदोलनकारियों ने “संसदीय कार्यमंत्री माफी मांगो”, “प्रेमचंद अग्रवाल इस्तीफा दो”, “मुख्यमंत्री लीपापोती बंद करो” और “राज्य आंदोलनकारी विधायक-मंत्री चुप्पी तोड़ो” जैसे नारे लगाए।
इसके बाद मंच के सदस्यों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा और मांग की कि विधानसभा में संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा की गई मर्यादा उल्लंघन की शिकायत राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और भाजपा अध्यक्ष तक पहुंचाई जाए। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि मंत्री माफी नहीं मांगते और उनका इस्तीफा नहीं लिया जाता, तो वे आंदोलन को और उग्र करेंगे।
इस प्रदर्शन में वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी रामपाल, सलाहकार केशव उनियाल, प्रदेश प्रवक्ता एवं जिला अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती, धर्मपाल सिंह रावत, पुष्पलता सिलमाणा, सुलोचना भट्ट, राधा तिवारी, तारा पांडे, अरुणा थपलियाल, रामेश्वरी नेगी, लक्ष्मी बिष्ट, संगीता रावत, शकुंतला रावत, बसंती सुंद्रियाल, रजनी कंडवाल, प्रमिला रावत, विजय लक्ष्मी सुंद्रियाल, लोक बहादुर थापा, मनोज नौटियाल, नारायण सिंह नेगी, वीर सिंह रावत, हरी सिंह मेहर, अनुराग भट्ट, विजय बलूनी, सुरेंद्र रावत, अनीता रावत, सुबोधिनी भट्ट, जयंती बलूनी, यशोदा ममगाईं, सरोजनी नौटियाल सहित कई अन्य राज्य आंदोलनकारी शामिल रहे।

