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धनतेरस केवल धन-संपत्ति का पर्व नहीं, आरोग्य और उत्तम स्वास्थ्य का भी प्रतीक : डॉ. ललित तिवारी

धनतेरस केवल धन-संपत्ति का पर्व नहीं, आरोग्य और उत्तम स्वास्थ्य का भी प्रतीक : डॉ. ललित तिवारी
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संवाददाता: ललित जोशी, नैनीताल

नैनीताल। धनतेरस भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व रखने वाला पर्व है। यह पर्व केवल भौतिक धन-संपत्ति और सुख-समृद्धि की कामना तक सीमित नहीं है, बल्कि निरोगी काया, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु का संदेश भी देता है। भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाए जाने वाले इस पर्व का आयुर्वेद और भारतीय चिकित्सा परंपरा से गहरा संबंध है।

डीएसबी परिसर, कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. ललित तिवारी के अनुसार, पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। त्रयोदशी तिथि पर उनके प्राकट्य के कारण इस दिन को धनत्रयोदशी अथवा धनतेरस कहा जाता है। भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अंश और देवताओं का वैद्य माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने संसार के कल्याण के लिए आयुर्वेद का ज्ञान प्रदान किया।

डॉ. तिवारी बताते हैं कि समुद्र मंथन से प्रकट होने के समय भगवान धन्वंतरि के चार हाथों में अमृत कलश, औषधियां, शंख और चक्र विद्यमान थे। इसी कारण धनतेरस का संबंध आरोग्य, चिकित्सा और जीवन की रक्षा से भी जुड़ा हुआ है। भारत सरकार द्वारा धनतेरस के अवसर पर राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस भी मनाया जाता है, जिससे आयुर्वेद की महत्ता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को बढ़ावा मिलता है।

धनतेरस पर धातु के बर्तन खरीदने की परंपरा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान धन्वंतरि के हाथ में पीतल का कलश था, इसलिए इस दिन धातु के बर्तन खरीदना शुभ माना जाने लगा। इसके साथ ही आर्थिक संपन्नता के प्रतीक के रूप में साबुत धनिया और घर से दरिद्रता एवं नकारात्मकता दूर करने के प्रतीक के रूप में झाड़ू खरीदने की परंपरा भी है।

इस दिन शाम को माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। वहीं, मृत्यु के भय से मुक्ति और परिवार की मंगलकामना के लिए घर के मुख्य द्वार पर यमराज के निमित्त दीपदान किया जाता है, जिसे यमदीपदान कहा जाता है।

डॉ. तिवारी के अनुसार, धनतेरस का वास्तविक संदेश यह है कि जीवन में धन-संपत्ति के साथ स्वास्थ्य को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। स्वस्थ शरीर ही सुख, समृद्धि और जीवन की उपलब्धियों का आधार है। इसी भाव को भारतीय परंपरा की यह उक्ति व्यक्त करती है—

“आरोग्यं परमं भाग्यं, स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्॥”

उन्होंने कामना की कि भगवान धन्वंतरि की कृपा और माता लक्ष्मी के आशीर्वाद से सभी के जीवन में उत्तम स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और खुशहाली बनी रहे।

देवभूमि खबर

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