श्रम विभाग से जुड़े मुद्दों पर इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन संग विचार-विमर्श, श्रम आयुक्त पीसी दुम्का ने दिए समाधान के निर्देश

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देहरादून। श्रम आयुक्त, उत्तराखण्ड हल्द्वानी की अध्यक्षता में श्रम विभाग से संबंधित मुद्दों पर इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में उद्योगपतियों और उद्योग संघों ने अपनी समस्याएं रखीं, जिन पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान सबसे पहले उद्योग संघों एवं उद्योगपतियों द्वारा उपकर (लेबर सेस) धनराशि जमा किए जाने से संबंधित पत्राचार पर स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया। इस पर श्रम आयुक्त ने बताया कि भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार उपकर अधिनियम 1996 के तहत लेबर सेस जमा कराना अनिवार्य है। जिन भवनों का लेबर सेस सही ढंग से जमा है, उनके अभिलेखों की पुष्टि के बाद उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन जहां सेस जमा नहीं हुआ है या आंशिक रूप से जमा है, वहां संबंधित पक्षों को इसे जमा करने का अवसर प्रदान किया जाएगा।

बैठक में उद्योग संघों द्वारा यह भी अनुरोध किया गया कि पुराने भवनों का मूल्यांकन वर्तमान दरों से न किया जाए। इस पर श्रम आयुक्त ने स्पष्ट किया कि भवन निर्माण लागत का आकलन निर्माण वर्ष के अनुरूप ही किया जाएगा और इसके लिए संबंधित भवन स्वामी को आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे।

इज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारों के संबंध में उद्योगपतियों ने जानकारी चाही। श्रम आयुक्त ने बताया कि फैक्ट्रीज एक्ट 1947 और शॉप एक्ट में संशोधन हेतु प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। वहीं लेबर पोर्टल की धीमी गति पर उद्योग संघों ने चिंता जताई। इस पर श्रम आयुक्त ने कहा कि आईटीआई लिमिटेड और मार्ग सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन लिमिटेड के साथ बैठक कर समस्या का समाधान किया जाएगा और इस हेतु एक विशेष हेल्पलाइन स्थापित कर मोबाइल नंबर और उद्योग संघों के माध्यम से सभी उद्योगों को सूचित किया जाएगा।

बैठक में यह भी सामने आया कि कई उद्योगों ने अब तक फैक्ट्री एक्ट 1947 के अंतर्गत पंजीकरण नहीं कराया है। इससे वहां कार्यरत श्रमिक न्यूनतम वेतन, बोनस और अन्य श्रम कानूनों के अंतर्गत मिलने वाले लाभों से वंचित हो रहे हैं। इस पर श्रम आयुक्त ने अपील की कि सभी कारखाने शीघ्र पंजीकरण कराएं। साथ ही सहायक श्रम आयुक्त, हरिद्वार को निर्देश दिए गए कि 15 सितम्बर के बाद सिडकुल इंडस्ट्रियल एरिया एवं निजी औद्योगिक क्षेत्रों की सूची बनाकर प्रस्तुत की जाए तथा अपंजीकृत कारखानों की पहचान कर रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए।

इसके अलावा बैठक में इस विषय पर भी चर्चा हुई कि श्रमिक संगठनों द्वारा समय-समय पर उठाई जाने वाली मांगों और शिकायतों पर जब श्रम विभाग सुनवाई करता है तो कुछ कारखाना प्रबंधक न तो उसमें उपस्थित होते हैं और न ही आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करते हैं। इससे प्रकरण का निस्तारण नहीं हो पाता और श्रमिकों में असंतोष उत्पन्न होता है। श्रम आयुक्त ने उद्योग संघों से अनुरोध किया कि वे अपने स्तर से सभी प्रतिष्ठानों को निर्देशित करें कि वे श्रमिकों की समस्याओं से संबंधित मामलों में विभाग को वांछित जानकारी उपलब्ध कराएं ताकि समय पर समाधान हो सके।

श्रम आयुक्त ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रमिकों, श्रमिक संगठनों, उद्योगपतियों एवं उद्योग संघों के साथ वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाते हुए परस्पर सामंजस्य स्थापित कर श्रमिकों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें।

बैठक में श्रम विभाग की ओर से श्रम आयुक्त, उत्तराखण्ड हल्द्वानी, श्री प्रकाश चन्द्र दुम्का, श्री अनिल पेटवाल, प्रभारी अपर श्रम आयुक्त, श्री विपिन कुमार, उप श्रम आयुक्त हरिद्वार, श्री प्रशान्त कुमार, सहायक श्रम आयुक्त हरिद्वार, श्री कमल किशोर कफलटिया, आरएम सिडकुल और श्री अनिल पुरोहित, श्रम प्रवर्तन अधिकारी सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

वहीं, उद्योग जगत की ओर से इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन के पदाधिकारी हरिन्दर गर्ग, कुमार शर्मा, शरद कुमार अग्रवाल, कुलदीप वर्मा, गजेन्द्र सिंह, गोविन्द महरवंत, संदीप दीक्षित, संदीप पराशर, शिवम् गोयल, नेत्रपाल सिंह, बलवंत सिंह बृजवाल, के.डी. शर्मा और धीरज समेत अन्य पदाधिकारी बैठक में उपस्थित रहे।

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