दून पुलिस ने 5 घंटे के भीतर लूट की घटना का किया खुलासा
देहरादून। दून में हुई लूट की वारदात का पुलिस ने महज 5 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। घटना को अंजाम देने वाले दोनों अभियुक्त नशे के आदी हैं, जिन्होंने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए लूट की योजना बनाई थी। पुलिस ने उनके कब्जे से लूटा गया मोबाइल फोन, नकदी और वारदात में इस्तेमाल की गई स्कूटी बरामद कर ली है।
घटना 23 फरवरी 2025 की रात परेड ग्राउंड के बाहर हुई थी, जब वादी राजीव कुमार पर दो अज्ञात युवकों ने हमला कर उनका ओप्पो कंपनी का मोबाइल फोन और 1100 रुपये नगद लूट लिए और सफेद रंग की स्कूटी से फरार हो गए। पीड़ित ने तुरंत थाना डालनवाला में घटना की शिकायत दर्ज कराई, जिस पर मु0अ0सं0- 35/2025 धारा- 115(2)/309(4) भा0न्या0सं0 के तहत मामला दर्ज किया गया।
एसएसपी देहरादून के निर्देश पर पुलिस टीम का गठन किया गया, जिसने घटनास्थल का निरीक्षण कर आस-पास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। संदिग्धों की पहचान के लिए पूछताछ की गई और पुलिस को जल्द ही अभियुक्तों का सुराग मिल गया। मात्र 5 घंटे के भीतर ही रेंजर्स ग्राउंड गेट के पास से दोनों अभियुक्तों – रौनक और परमजीत सिंह उर्फ पम्मी – को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उनके पास से लूटा गया मोबाइल, नकदी और स्कूटी भी बरामद कर ली।
पूछताछ के दौरान अभियुक्तों ने अपना जुर्म कबूल किया और बताया कि वे नशे के आदी हैं और नशे की जरूरतों को पूरा करने के लिए लूट की वारदात को अंजाम दिया था।
रौनक पुत्र रणजीत मल्होत्रा निवासी 52 अंसारी मार्ग, मच्छी बाजार, थाना कोतवाली नगर, देहरादून का रहने वाला है और उसकी उम्र 29 वर्ष है। वहीं, दूसरा अभियुक्त परमजीत सिंह उर्फ पम्मी पुत्र गुलचन्द सिंह निवासी 88/89 डाण्डीपुर मोहल्ला, थाना कोतवाली नगर, देहरादून का रहने वाला है और उसकी उम्र 33 वर्ष है।
अभियुक्तों के कब्जे से लूटे गए सामान को बरामद कर लिया गया है, जिसमें एक ओप्पो कंपनी का नीले रंग का मोबाइल फोन, 1100 रुपये नगद और घटना में प्रयुक्त सफेद रंग की स्कूटी (संख्या: UK07DJ 2187) शामिल है।
घटना के अनावरण में थाना डालनवाला की पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई की। टीम का नेतृत्व उपनिरीक्षक (उ0नि0) देवेन्द्र गुप्ता ने किया।इस अभियान में उनके साथ कांस्टेबल (का0) उमेश गिरी भी शामिल रहे, जिन्होंने अभियुक्तों की पहचान और धरपकड़ में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा कांस्टेबल (का0) तेजवीर सिंह ने भी तकनीकी साक्ष्य एकत्रित करने और अभियुक्तों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। गिरफ्तारी के बाद अभियुक्तों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

