आर्थिक आत्मनिर्भरता एवं विकसित भारत @ 2047 भारत के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला : प्रो. एच. सी. पुरोहित

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देहरादून।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य सत्यकाम ने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने हर क्षेत्र में प्रगति की है। आज भारत तेज गति से बढ़ती विश्व की एक उभरती आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित है। 2014 में हमारी अर्थव्यवस्था 10वें स्थान पर थी, जो 2025 में चौथे स्थान तक पहुँच गई है और 2027 तक यह तीसरी आर्थिक शक्ति बन जाएगी। कुलपति ने सरकार द्वारा संचालित जनकल्याण के कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि जनकल्याण के कार्यक्रमों से देश के आम नागरिक के जीवन में बदलाव आ रहा है, जो देश के सामाजिक विकास के लिए आवश्यक है। कुलपति ने कहा कि शिक्षण संस्थानों को देश में हुए अभूतपूर्व बदलाव और विकास पर शोध एवं अध्ययन कार्य संचालित करना चाहिए।

राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज द्वारा 12 साल बेमिसाल विषय पर आयोजित व्याख्यानमाला के अंतर्गत “आर्थिक आत्मनिर्भरता एवं विकसित भारत @ 2047” विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में आभासी माध्यम से संबोधित करते हुए प्रो. एच. सी. पुरोहित, डीन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण, दून विश्वविद्यालय, देहरादून ने कहा कि भारत का विकास पथ केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, नवाचार, सामाजिक समावेशन और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ने का राष्ट्रीय संकल्प है।

प्रो. पुरोहित ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत ने अनेक चुनौतियों के बावजूद अपनी आर्थिक यात्रा में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ते हुए आज भारत सेवा क्षेत्र, उद्योग, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत @ 2047 का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कृषि विकास, मजबूत एमएसएमई क्षेत्र, आधुनिक अधोसंरचना, कौशल विकास, तकनीकी प्रगति और उद्यमिता को बढ़ावा देना आवश्यक है। युवाओं को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए उन्होंने कहा कि युवा ऊर्जा को कौशल, ज्ञान और अवसरों से जोड़कर भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है और इन सबके विकास के लिए पिछले 12 वर्षों में देश में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

प्रो. पुरोहित ने आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि अपनी क्षमताओं को विकसित करते हुए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनना है। डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप संस्कृति और तकनीकी नवाचार भारत की आर्थिक मजबूती के प्रमुख आधार बन रहे हैं और देश पिछले 12 वर्षों में तेज गति से प्रगति पथ पर अग्रसर है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत @ 2047 का निर्माण तभी संभव है, जब प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान दे। शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और सामाजिक भागीदारी विकसित राष्ट्र की मजबूत नींव हैं, जिसकी मजबूत नींव 12 वर्षों के कालखंड में रखी गई है।

प्रो. पुरोहित ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल रोजगार प्राप्त करने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजक और नवाचार के वाहक बनें। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति ही आने वाले समय में देश को विश्व नेतृत्व की दिशा में ले जाएगी, क्योंकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इस दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

कार्यक्रम का संचालन डाॅ0 सुनील कुमार ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो0 आनंदानंद त्रिपाठी द्वारा किया गया। अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के नोडल अधिकारी प्रो0 संजय कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित होने वाली इस व्याख्यान माला के अंतर्गत विभिन्न सत्रों की जानकारी साझा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अनवरत् शैक्षणिक उन्नयन की दिशा की ओर अग्रसर है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विभिन्न संस्थानों के शिक्षाविद्, क्षेत्रीय केन्द्रों के अधिकारी, रिजनल सेंटर के डायरेक्टर तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे।

देवभूमि खबर

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