हरिद्वार पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए 72 घंटे के भीतर बच्चा चोरी करने वाले गिरोह का किया भंडाफोड़
हरिद्वार। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र सिंह डोबाल के नेतृत्व में हरिद्वार पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए 72 घंटे के भीतर बच्चा चोरी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। चोरी हुआ तीन माह का मासूम शिशु सकुशल बरामद कर माता-पिता को सौंपा गया।
घटना 11 अक्टूबर 2025 की है, जब अमरोहा ज्योतिबा फुले नगर निवासी जहीर अंसारी अपनी पत्नी और तीन माह के बेटे के साथ जियारत के लिए कलियर आया था। रात बिताने के दौरान पति-पत्नी एक दुकान के पास सो गए। देर रात दो अंजान महिलाएं वहां पहुंचीं और उन्होंने दंपत्ति से बातचीत करते हुए घुलना-मिलना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद एक महिला शिकायतकर्ता को चाय पिलाने के बहाने अपने साथ ले गई, जबकि दूसरी महिला सो रही पत्नी की गोद से बच्चा चुरा ले गई और फरार हो गई।
मामले की सूचना मिलते ही एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने तुरंत मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए और कलियर समेत आसपास के थानों की संयुक्त पुलिस टीम गठित कर दी। साथ ही सीआईयू रुड़की प्रभारी को तकनीकी सहायता के निर्देश जारी किए गए। पुलिस टीम ने मैनुअल और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर बच्चा चोरी की कड़ी मेरठ तक पहुंचाई, जहां से मामले का पूरा जाल खुल गया।
जांच के दौरान पुलिस ने आस मोहम्मद लंगड़ा को पकड़ा, जिसकी निशानदेही पर उसकी पत्नी शहनाज और साथी सलमा को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि बच्चे को चोरी करने के बाद उसे बेचने की योजना पहले से बनाई गई थी। आगे की जांच में इस पूरे गिरोह में शामिल अंचन, नेहा शर्मा और बच्चे के खरीदार विशाल गुप्ता उर्फ अच्ची के नाम सामने आए।
पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी विशाल गुप्ता की शादी को दस वर्ष हो चुके थे, परंतु कोई संतान नहीं थी। मेरठ के प्रेम अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मुलाकात नेहा शर्मा से हुई, जो वहां पेशेंट कोऑर्डिनेटर के रूप में काम करती थी। इसी दौरान दोनों के बीच बातचीत में बच्चे की चाहत का विषय आया, जिसके बाद नेहा शर्मा और अन्य आरोपियों ने कलियर जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके से बच्चा चोरी करने की योजना बनाई।
पूरे सौदे में तीन लाख रुपये में बच्चा अंचन को, तीन लाख नब्बे हजार में नेहा शर्मा को और अंततः चार लाख नब्बे हजार रुपये में विशाल गुप्ता को बेच दिया गया। इस प्रकार सभी आरोपियों ने बच्चे की खरीद-फरोख्त से मोटा लाभ अर्जित किया।
पुलिस टीम ने सघन पूछताछ और मुखबिर तंत्र की मदद से 55 घंटे के भीतर मासूम शिशु को विशाल गुप्ता के घर से सकुशल बरामद कर लिया। बच्चे को देखते ही माता-पिता की आंखें भर आईं। एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने स्वयं इस संवेदनशील मामले की मॉनिटरिंग की और उच्चाधिकारियों के निर्देशन में पूरे प्रकरण का सफल निस्तारण कराया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में आस मोहम्मद लंगड़ा, उसकी पत्नी शहनाज, सलमा, अंचन, नेहा शर्मा और विशाल गुप्ता शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक लाख रुपये नकद बरामद किए हैं, जबकि ऑनलाइन भेजी गई एक लाख रुपये की रकम को भी खाते में फ्रीज कर दिया गया है।
एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि इस प्रकार के अपराधों से बचने के लिए अंजान लोगों पर सहज विश्वास न करें, क्योंकि एक क्षण की लापरवाही किसी बड़ी घटना का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि पुलिस जनता की सुरक्षा और विश्वास बहाली के लिए पूरी निष्ठा से काम कर रही है।
