भारतीय ज्ञान परंपरा विशालता एवं सहिष्णुता का बोध कराती है: प्रोफेसर मिश्र
देहरादून।अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तराखंड इकाई के शैक्षिक मंथन कार्यक्रम के तहत “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: भारतीय ज्ञान परंपरा एवं मूल्य आधारित शिक्षा” विषय पर स्वामी रामतीर्थ परिसर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय टिहरी परिसर द्वारा आयोजित किया गया l
इस वेबीनार को संबोधित करते हुए संपूर्णनंद संस्कृत विश्वविद्यालय,वाराणसी के आचार्य एवं अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो शैलेश मिश्र ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा विभिन्न धाराओं का मिश्रण है, ये प्रारंभ में छोटे सूत्र में दिखेंगे लेकिन उनका दर्शन और उसका संदेश बहुत व्यापक है और इसीलिए यह ज्ञान परंपरा राष्ट्रीय शिक्षा नीति का हिस्सा बनी है जिस प्रकार एक छोटा बीज बहुत बड़े विशाल वृक्ष को जन्म देता है ऐसे ही हमारे शास्त्र विशालता और संपूर्णता लिए ज्ञान विज्ञान का अद्भुत खजाना है l यह शिक्षा नीति सिर्फ एक विषय पर केंद्रित न होकर बहू विषयक विकल्प प्रदान करती है, जिससे छात्रों की रचनात्मक को बढ़ाने में सहायता मिलेगी l
डॉ मिश्र ने कहा कि हमारी परंपरा में विद्यार्थी प्रश्नों के माध्यम से संवाद और शास्त्रों पर विमर्श गुरु के सानिध्य में ज्ञान प्राप्त कर अपनी जिज्ञासा को संतुष्ट करता है, इससे स्पष्ट होता है कि पाठ्यक्रम और विषय वस्तु छात्र केंद्रित होती थी इसलिए विद्यार्थी उन विषयों पर गुरु से संवाद और प्रश्न करने के लिए मुक्त और स्वतंत्र ही नहीं रहते थे, बल्कि प्रेरित भी होते थे, ज्ञान के प्रति हमारी सहिष्णुता ही हमारी विरासत है और ज्ञान किसी भी दिशा से मिले इसको प्राप्त करने, सीखने की हमारी परंपरा रही है, दूसरी ओर दुनिया की बाकी सभ्यताये अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने और दूसरी धारा को निम्नतर आंकने की रही है l
प्रो मिश्र ने कहा कि सतत विकास से प्रेरित आवश्यकताओं की पूर्ति के अनुरूप ही उपभोग हमारी सभ्यता और ज्ञान परंपरा का हिस्सा रही है हमने उपभोक्तावाद को कभी भी बढ़ावा नहीं दिया और आज विश्व इन्ही संकटों का सामना कर रहा है और इसलिए भारत की ज्ञान परंपरा वैश्विक स्तर पर सराही जा रही है l
प्रो मिश्र विभिन्न शास्त्रों में वर्णित सिद्धांतों उनकी वैज्ञानिकता और दर्शन का विस्तार से वर्णन करते हुए भारतीय दर्शन की व्यापकता को कई उदाहरण के साथ व्याख्या करते हुए प्रस्तुत किया l
इस अवसर पर डॉक्टर सुधांशु जोशी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा आज के वैश्विक परिवेश में एक आदर्श जीवन शैली एवं प्रश्नचित एवं खुशहाल जीवन यापन करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैl
वेबीनार के आयोजक प्रो के के वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधान युवाओं को संस्कारित बनाने और दायित्व बोध कराने में सहायक होगेँ l
कार्यक्रम का संचालन एवं अतिथियों का परिचय प्रो एच सी पुरोहित ने किया l
इस वेबीनार में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की महिला इकाई की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो अलका सूरी, प्रो रवि शरण दीक्षित, प्रो आलोक सागर गौतम, डॉ कविता काला, प्रो तेजिंदर कुमार, प्रो अनिल कुमार, डॉ चंद्रकांत तिवारी, डॉ आलोक कुमार सिंह सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे l

