कृषि में नवाचार केवल तकनीक नहीं—बल्कि यह युवा मनों को परिवर्तन का बीज बोने का साहस देना है: प्रो. सुरेखा डंगवाल
देहरादून।एक परिवर्तनकारी और प्रेरणादायक एग्री-उद्यमिता बूटकैंप का आयोजन 25 अप्रैल 2025 को Centre for Innovation, Incubation, Entrepreneurship and Industrial Relations (CIIEIR) और Office of Dean Student Welfare द्वारा CSIR – PUSA Krishi के सहयोग से संयुक्त रूप से किया गया। यह कार्यक्रम कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल के दूरदर्शी नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य छात्रों में उद्यमशीलता की भावना जागृत करना और उन्हें कृषि से संबंधित स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध अनुदानों की विस्तृत जानकारी प्रदान करना था। इस बूटकैंप का मुख्य फोकस छात्रों के नवाचार-आधारित व्यावसायिक विचारों को प्रोत्साहित करना और उन्हें कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप्स की ओर प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें से कई ने अपने अनोखे व्यावसायिक विचार प्रस्तुत किए। सफलतापूर्वक अपने विचार प्रस्तुत करने वालों में राहिनी, रिद्धिमा, संचित, सिमरन, मौर्य धीरज, गुड्डू, और बाफरैलू नगाडोंग शामिल रहे, जिन्होंने अपने जोश और विचारशीलता से विशेषज्ञों और दर्शकों को प्रभावित किया। छात्रों को मार्गदर्शन देने के लिए CSIR – PUSA Krishi से अनुभवी विशेषज्ञ शामिल हुए, जिनमें श्री विपुल शाह (मार्केटिंग मैनेजर), श्री किरण आर. एस. नायर (लीड ICT & फाइनेंस) और श्री ऋतिक वर्मा (बिजनेस एक्जीक्यूटिव) शामिल थे। इन्होंने छात्रों को उनके व्यवसाय मॉडल को बेहतर बनाने, अनुदान प्रस्ताव तैयार करने और कृषि स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में सफलता प्राप्त करने की रणनीतियाँ सिखाईं।
इस सत्र में कई विभागों के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें दिशा कोहली, अमीषा, गुरारपन, आकाश रावत, ललित मोहन असवाल, वंशिका चौधरी, अमन, मंसा, ऋषभ शर्मा, आकाश, हर्ष घाघट, दीप्सिखा शर्मा, सचिन नौटियाल, दीक्षित, और आकाशदीप प्रमुख रहे। डॉ. सुधांशु जोशी, समन्वयक CIIEIR, ने कार्यक्रम के अंत में सभी विशेषज्ञों, आयोजन टीम और उत्साही छात्र प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए वोट ऑफ थैंक्स प्रस्तुत किया।
पूरा सत्र श्री संचित, सुश्री सिमरन और सुश्री तनुजा जोशी के कुशल समन्वय और स्वयंसेवक कार्यों द्वारा सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। यह बूटकैंप छात्रों को उनके कृषि नवाचारों को प्रभावशाली स्टार्टअप्स में बदलने हेतु आवश्यक ज्ञान, संसाधन और आत्मविश्वास प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ। यह आत्मनिर्भर भारत की भावना के अनुरूप है और कृषि क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा देता है।

