जैन महापुरुषों के योगदान से नई पीढ़ी को परिचित कराना जरूरी: गोपाल सिंघल

देहरादून। जैन समाज के गौरवशाली इतिहास, महान सम्राटों, वीर योद्धाओं और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान से नई पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से जैन मिलन सुभाष नगर एवं जैन मिलन चेतना की ओर से बनियावाला स्थित लिटिल स्टार अकेडमी में ‘जैन सम्राट गौरव प्रतियोगिता’ का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में 50 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। इस दौरान प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में अपने ऐतिहासिक गौरव के प्रति जागरूकता पैदा करना, जैन महापुरुषों के योगदान को जन-जन तक पहुंचाना और भावी पीढ़ी को अपने वास्तविक नायकों के बारे में जानकारी देना रहा।
कार्यक्रम में जैन मिलन सुभाष नगर के अध्यक्ष वीर गोपाल सिंघल ने भारतीय जैन मिलन के इतिहास एवं उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इतिहास की पुस्तकों में अनेक वास्तविक नायकों और उनके योगदान को अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया है। जैन समाज के कई महान व्यक्तित्वों के योगदान से नई पीढ़ी आज भी पूरी तरह परिचित नहीं है। उन्होंने चंद्रगुप्त मौर्य, बिंबिसार, भामाशाह और राजा टोडरमल जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को गौरवशाली अतीत से जोड़ना और उनमें इतिहास के प्रति जिज्ञासा पैदा करना आवश्यक है।
क्षेत्रीय अध्यक्ष अतिवीर संजय जैन ने कहा कि बच्चों को अपने समाज के महान व्यक्तित्वों के जीवन, आदर्शों और योगदान की जानकारी मिलनी चाहिए। इससे वे प्रेरणा लेकर राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने दायित्वों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
विद्यालय की प्रधानाचार्या ने आयोजन के लिए जैन मिलन के पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें भी इतिहास के इस पक्ष की पूरी जानकारी नहीं थी। विद्यालय में इस तरह के आयोजन से विद्यार्थियों के ज्ञान में वृद्धि हुई है और विद्यालय का मान भी बढ़ा है।
कार्यक्रम में केंद्रीय संयोजक अतिवीर दिनेश जैन, अमित जैन, क्षेत्रीय मुख्य संयोजक वीर अजय जैन, जैन मिलन चेतना की अध्यक्ष वीरा रीना सिंघल, मंत्री संध्या जैन, शाखा संयोजक वीरा अंजलि जैन एवं रितिका जैन सहित अकेडमी के निदेशक शरद गुप्ता, संजय गुप्ता, प्रधानाचार्या और शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को जानने, महापुरुषों के योगदान को समझने और अपने इतिहास पर गर्व करने का संदेश दिया गया।


