पीएम गति शक्ति से उत्तराखंड में एकीकृत अवसंरचना विकास और सुशासन को मिलेगी नई दिशा: प्रो. सुरेखा डंगवाल

देहरादून। उत्तराखंड में एकीकृत अवसंरचना विकास, परिवहन व्यवस्था और प्रौद्योगिकी आधारित सुशासन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से दून विश्वविद्यालय में 22–23 अक्टूबर 2026 को आयोजित दो दिवसीय पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान क्षमता निर्माण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन उत्तराखंड सरकार के नियोजन विभाग के अंतर्गत लोक नीति एवं सुशासन केंद्र तथा दून विश्वविद्यालय के प्रबंधन संकाय स्थित संभार तंत्र एवं आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन उत्कृष्टता केंद्र द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सरकारी अधिकारियों को भौगोलिक सूचना प्रणाली, भू-स्थानिक विश्लेषण, विभागीय आंकड़ों के एकीकरण तथा अवसंरचना परियोजनाओं के वैज्ञानिक नियोजन का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल के लिए प्रस्तावित संदेश में कहा गया कि “पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान देश में एकीकृत अवसंरचना विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी, आंकड़ों पर आधारित निर्णय और विभागीय समन्वय का विशेष महत्व है। इस प्रकार के संयुक्त क्षमता निर्माण कार्यक्रम सरकारी अधिकारियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने के साथ विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने में सहायक होंगे।”
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के वैज्ञानिक श्री शशांक लिंगवाल ने “विभागीय भौगोलिक सूचना प्रणाली आंकड़ा-संग्रह का निर्माण: विभागीय उपयोगकर्ता का दृष्टिकोण” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि भू-स्थानिक आंकड़ों का उपयोग विकास परियोजनाओं के नियोजन, संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन, विभागीय समन्वय तथा परियोजनाओं की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क, आपदा प्रबंधन और आधारभूत सुविधाओं के विकास में यह तकनीक अत्यंत उपयोगी है।
कार्यक्रम के समापन समारोह में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के प्रबंधन अध्ययन विभाग के प्रो. संतोष रंगनेकर, दून विश्वविद्यालय के प्रबंधन संकाय की विभागाध्यक्ष प्रो. रीना सिंह, प्रो. एस. सी. पुरोहित, उत्कृष्टता केंद्र के समन्वयक डॉ. सुधांशु जोशी, पीएम गति शक्ति के सहायक निदेशक एवं नोडल अधिकारी डॉ. नरेश चंद्र तथा नियोजन विभाग के सहायक प्रोग्रामर डॉ. अजय कुकशल उपस्थित रहे। इस अवसर पर तकनीकी नवाचार, प्रभावी प्रबंधन, संस्थागत सहयोग और वैज्ञानिक नियोजन के महत्व को रेखांकित किया गया। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए।
समापन सत्र में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए डॉ. सुधांशु जोशी ने कहा कि पीएम गति शक्ति की सफलता के लिए आधुनिक तकनीक के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन और प्रभावी विभागीय समन्वय आवश्यक है। उन्होंने बताया कि दून विश्वविद्यालय का संभार तंत्र एवं आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन उत्कृष्टता केंद्र परिवहन, आपूर्ति श्रृंखला, कृषि एवं डेयरी संभार तंत्र, भू-स्थानिक नियोजन तथा सतत विकास के क्षेत्रों में अनुसंधान, परामर्श और क्षमता निर्माण के माध्यम से राज्य की विकासात्मक आवश्यकताओं के समाधान की दिशा में कार्यरत है। उन्होंने कहा कि दोनों संस्थानों की संयुक्त प्रशिक्षण पहल अनुसंधान, नीति-निर्माण और प्रशासनिक क्रियान्वयन के बीच महत्वपूर्ण सेतु का कार्य कर रही है।
डॉ. जोशी ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, प्रतिभागियों एवं आयोजक संस्थानों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल संचालन में ऐश्वर्या, अक्षय नवराज, कैलाश रावत तथा तनुजा जोशी के योगदान की सराहना की। यह संयुक्त पहल उत्तराखंड में वैज्ञानिक नियोजन, प्रशासनिक दक्षता और सतत अवसंरचना विकास को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।


