वीर शहीद केसरी चंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डाकपत्थर में दो दिवसीय ऑनलाइन सेमिनार सम्पन्न — बौद्धिक संपदा अधिकार पर गहन चर्चा, शिक्षा में नवाचार व नैतिक लेखन पर विशेषज्ञों के विचार
डाकपत्थर, विकासनगर, देहरादून, उत्तराखंड। आज दिनांक 9 दिसंबर 2025 को उत्तराखंड स्टेट काउन्सिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (यू-कॉस्ट), देहरादून द्वारा वित्तपोषित, आईपीआर प्रकोष्ठ एवं रसायन विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ऑनलाइन सेमिनार के दूसरे दिन बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights – IPR) से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किए गए।
कार्यक्रम के प्रमुख वक्ताओं में प्रो. वर्षा पर्चा, अधिष्ठाता, डॉल्फिन इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल साइंसेस देहरादून ने “संपत्ति अधिकार के माध्यम से उच्च शिक्षा में परिवर्तन: 20वीं सदी की चुनौतियाँ” विषय पर अपने प्रस्तुतिकरण में कहा कि मजबूत बौद्धिक अधिकार उच्च शिक्षा को नवाचार, उद्यमशीलता और आर्थिक विकास के एक शक्तिशाली इंजन में बदल देते हैं।
प्रस्तुतिकरण के विषय विशेषज्ञ डॉ. दीपक सेमवाल, आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय हरिद्वार ने “कृत्रिम बुद्धि के युग में नैतिक लेखन — साहित्यिक चोरी और कॉपीराइट संबंधी चिंताएँ” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कहा कि एआई युग में नैतिक लेखन का अर्थ है शक्तिशाली तकनीक का उपयोग करते हुए भी मौलिक, ज़िम्मेदार, सत्यनिष्ठ और अकादमिक ईमानदारी बनाए रखना।
यू-कॉस्ट के बौद्धिक सूचना केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. हिमांशु गोयल ने स्वदेशी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पीढ़ियों से चले आ रहे ज्ञान, नवाचार और प्रथाओं को गलत पेटेंट होने और दुरुपयोग से बचाने की आवश्यकता है। उन्होंने हल्दी और नीम मामलों के बाद भारत द्वारा TKDL (Traditional Knowledge Digital Library) जैसी पहल के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान संरक्षण की वैश्विक बहस को आगे बढ़ाने पर बात की।
डॉ. अंकुर सारस्वत, परियोजना प्रबंधक, IISER भोपाल ने “विचार से परे: बौद्धिक संपदा अधिकार के साथ नवाचार को एक परिसंपत्ति में बदलना” विषय पर कहा कि आईपीआर नवाचार को कानूनी संरक्षण, स्वामित्व और आर्थिक मूल्य प्रदान करता है, जिससे आविष्कारकों को मान्यता, राजस्व और प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलता है, जबकि उनके कार्य की नकल और दुरुपयोग को रोका जा सकता है।
यू-कॉस्ट देहरादून के वैज्ञानिक द्वारा डिजिटल युग में आईपीआर के समक्ष ऑनलाइन नकल, सामग्री की चोरी, प्रवर्तन कठिनाई, एआई-जनित कंटेंट भ्रम, जागरूकता की कमी और सीमा पार उल्लंघन जैसी चुनौतियों पर चर्चा की गई।
महाविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रोहित वर्मा ने बताया कि NEP पाठ्यक्रम में Intellectual Property (IP) इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह छात्रों में नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति, रोजगार-उन्मुख कौशल और plagiarism से बचाव को बढ़ावा देता है।
समापन समारोह में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो (डॉ) डी. एस. नेगी द्वारा सभी व्याख्याताओं और प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार के व्याख्यान माला से छात्रों को अत्यधिक लाभ मिला है और इससे वे बौद्धिक संपदा युग में अपना योगदान और अधिक सार्थक रूप से दे सकेंगे। उन्होंने छात्र-छात्राओं से विकसित भारत 2047 के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित कार्यक्रमों में पूर्ण मनोयोग से प्रतिभाग करने की अपील की।
समापन सत्र में संयोजक डॉ. अरविंद मोहन पैन्यूली द्वारा यू-कॉस्ट देहरादून, महाविद्यालय परिवार, प्राचार्य प्रो. डी. एस. नेगी और IPR प्रकोष्ठ के सभी सदस्यों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पूजा राठौड़ द्वारा किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय मीडिया प्रकोष्ठ की प्राध्यापिका डॉ. राजकुमारी भंडारी चौहान, आईक्यूएसी संयोजक प्रो. अरविंद कुमार अवस्थी, वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. आर. एस. गंगवार, डॉ. विनोद रावत, डॉ. आर. पी. बडोनी, डॉ. अनिल शाह, डॉ. सुशील सती, डॉ. आराधना भंडारी, डॉ. पी. एस. चौहान, डॉ. योगेश भट्ट, डॉ. के. के. बंगवाल तथा छात्र-छात्राएँ शिवानी सिरोही, शिवांश तिवारी, शैली राठौड़, जैनब अब्बासी, अभिषेक पांचाल सहित अन्य उपस्थित रहे।

