मायापुर–पीपलकोटी THDC टनल हादसा: 12 श्रमिक सुरक्षित रेस्क्यू, 7 की मौत, 3 अब भी लापता

मायापुर–पीपलकोटी THDC टनल हादसा: 12 श्रमिक सुरक्षित रेस्क्यू, 7 की मौत, 3 अब भी लापता
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चमोली। मायापुर (पीपलकोटी) क्षेत्र में स्थित THDC की निर्माणाधीन विष्णुगाड–पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की TRT टनल में मलबा और पानी भरने के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। SDRF समेत विभिन्न एजेंसियां टनल के भीतर फंसे लोगों की तलाश में युद्धस्तर पर सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून के अनुसार करीब 3 किलोमीटर लंबी टनल के लगभग 1.50 किलोमीटर हिस्से में भूधंसाव के कारण मलबा और पानी भर गया था। हादसे में कुल 22 लोगों के फंसे होने की सूचना मिली थी। इनमें से 12 घायलों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि 7 लोगों की मौत की सूचना है। वहीं 3 लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है। राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग के लिए टनल के अंदर गए 6 बचावकर्मी भी सुरक्षित हैं।

SDRF सेनानायक श्री अर्पण यदुवंशी के निर्देशन में SDRF की छह टीमें घटनास्थल पर लगातार रेस्क्यू अभियान में जुटी हैं। टनल के भीतर मलबा, पानी, सीमित स्थान और अन्य चुनौतियों के बीच रेस्क्यू विशेषज्ञ अत्यंत सावधानी और आपसी समन्वय के साथ अभियान चला रहे हैं।

रेस्क्यू किए गए घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। 11 घायलों का उपचार जिला चिकित्सालय गोपेश्वर, जबकि घायल रोहित पाण्डे का उपचार बेस अस्पताल श्रीनगर में चल रहा है।

हादसे में मृतकों की पहचान प्रदीप पंवार (31), मुकेश सिंह, दुर्लभ शर्मा, विजय हंसदा, जितेन्द्र कुमार, लोकेश्वर और भुनेश्वर के रूप में हुई है। मृतकों में टिहरी गढ़वाल, चमोली, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लोग शामिल हैं।

रेस्क्यू एजेंसियों के अनुसार लुकास टोपनो निवासी झारखंड, चेतन पोयाम और देवनाथ निवासी छत्तीसगढ़ अभी लापता हैं। इनकी तलाश के लिए टनल के भीतर सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है।

राहत एवं बचाव अभियान में SDRF, NDRF, ITBP, पुलिस तथा अन्य विशेषज्ञ और तकनीकी टीमें संयुक्त रूप से काम कर रही हैं। टनल में मौजूद मलबे और पानी के बीच सभी एजेंसियां बेहतर समन्वय के साथ अभियान को आगे बढ़ा रही हैं। रेस्क्यू टीमों की सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

प्रशासन के अनुसार घायलों, मृतकों और लापता व्यक्तियों के आंकड़ों में सर्च एवं रेस्क्यू अभियान के दौरान आवश्यकतानुसार बदलाव संभव है।

देवभूमि खबर

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