मातृभाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं है; यह हमारी सांस्कृतिक चेतना और बौद्धिक विकास की आधारशिला है, इसका संरक्षण हमारी पहचान का संरक्षण है” — कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल
दून विश्वविद्यालय के भाषा विद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का आयोजन अत्यंत उत्साह, रचनात्मकता और सांस्कृतिक गरिमा के साथ किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भाषाई विविधता के महत्व को रेखांकित करना, मातृभाषाओं के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा विद्यार्थियों को अपनी भाषाई और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना था। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
यह आयोजन फ्रेंच एवं फ्रैंकोफोन अध्ययन विभाग, चीनी अध्ययन विभाग, जर्मन अध्ययन विभाग, जापानी अध्ययन विभाग और स्पेनिश अध्ययन विभाग द्वारा अंग्रेज़ी विभाग के सहयोग से संयुक्त रूप से आयोजित किया गया, जो भाषा विद्यालय की बहुभाषिक और अंतःविषय दृष्टि को सशक्त रूप से प्रतिबिंबित करता है।
कार्यक्रम की रूपरेखा का प्रमुख उद्देश्य यह था कि मातृभाषा को केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि विचार, संवेदना और सांस्कृतिक स्मृति के वाहक के रूप में समझा जाए। इस दृष्टि से आयोजित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भाषाओं की जीवंतता और समकालीन प्रासंगिकता को प्रभावी ढंग से सामने रखा।
सांस्कृतिक सत्र में कविता पाठ, बहुभाषी गीतों की प्रस्तुति तथा विचारोत्तेजक भाषण शामिल थे, जिनमें मातृभाषाओं की भूमिका—व्यक्तित्व निर्माण, सामाजिक जुड़ाव और सांस्कृतिक निरंतरता—पर गहन विमर्श प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण जापानी अध्ययन विभाग के एक छात्र द्वारा प्रस्तुत स्वलिखित एवं स्वनिर्मित रैप रहा, जिसने आधुनिक संगीत शैली के माध्यम से भाषाई गौरव और पहचान की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त किया। इस प्रस्तुति ने युवाओं के बीच मातृभाषा विमर्श को नए और रचनात्मक आयाम प्रदान किए।
कार्यक्रम के दौरान लगाए गए इंटरैक्टिव स्टॉल भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इनमें क्रोशे स्टॉल, भाषा-आधारित खेल, फेस पेंटिंग तथा विद्यार्थियों द्वारा संचालित उत्पाद स्टॉल शामिल थे। इन स्टॉलों ने न केवल रचनात्मकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया, बल्कि छात्र उद्यमिता और अनुभवात्मक अधिगम (experiential learning) को भी बढ़ावा दिया। भाषा-आधारित खेलों ने सहभागियों को मनोरंजक तरीके से विभिन्न भाषाओं से परिचित कराया, वहीं हस्तनिर्मित उत्पादों और कलात्मक गतिविधियों ने विद्यार्थियों की सृजनात्मक क्षमताओं को मंच प्रदान किया।
कार्यक्रम का समापन भाषाई विविधता के सम्मान, मातृभाषाओं के संरक्षण तथा बहुभाषिक सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। समग्र रूप से, दून विश्वविद्यालय में मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव रहा, बल्कि यह भाषाओं को जीवित परंपराओं के रूप में समझने और संरक्षित करने की दिशा में एक सार्थक शैक्षणिक पहल के रूप में भी स्थापित हुआ।

