₹2.60 करोड़ की ठगी की रकम को नकदी और विदेशी मुद्रा में बदलने वाले नेटवर्क का खुलासा, 20 राज्यों में 163 FIR से जुड़े साइबर खातों के फिंगरप्रिंट

पणजी । प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गोवा के चर्चित “डिजिटल अरेस्ट” साइबर ठगी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को गिरफ्तार किया है। दोनों को 23 अगस्त को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया। 24 अगस्त को विशेष पीएमएलए अदालत, गोवा में पेश किए जाने के बाद अदालत ने दोनों को 29 अगस्त तक पांच दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया।
जांच उत्तर गोवा साइबर क्राइम थाने में दर्ज FIR से जुड़ी है। मामले में एक महिला को वीडियो कॉल पर लगातार निगरानी में रखते हुए यह विश्वास दिलाया गया कि वह जांच के घेरे में है। आरोपियों ने उसे डराकर 21 मई से 2 जून 2025 के बीच कथित “सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट” में ₹2.60 करोड़ से अधिक ट्रांसफर करा लिए।
ईडी की जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को पहले बैंक खातों के जरिए नकदी में बदला गया और इसके बाद आरबीआई से लाइसेंस प्राप्त फुल-फ्लेज्ड मनी चेंजर्स के माध्यम से विदेशी मुद्रा में परिवर्तित किया गया। रकम को कुछ ही घंटों में निष्क्रिय और नए बैंक खातों के जरिए 400 से अधिक लाभार्थी खातों में ट्रांसफर किया गया।
जांच में जुड़े कमोडिटी, ट्रेडिंग, ट्रैवल और विदेशी मुद्रा कारोबार से संबंधित संस्थाओं के बैंक लेनदेन ₹27,850 करोड़ से अधिक पाए गए। इन संस्थाओं ने करीब ₹2,904 करोड़ नकद जमा किए, जिसमें लगभग ₹584.70 करोड़ की राशि 61,448 अलग-अलग लेनदेन के जरिए विभिन्न स्थानों पर स्थापित बल्क नोट एक्सेप्टेंस मशीनों से जमा की गई।
ईडी के अनुसार इस नेटवर्क से जुड़े साइबर खातों के फिंगरप्रिंट 20 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज 163 FIR से जुड़े पाए गए हैं। मामले में जांच आगे जारी है।
