उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आरआईएमसी के कैडेट्स को देश सेवा और साहस का संदेश दिया, बल और विवेक के संयोजन पर दिया जोर
देहरादून।उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने आज देहरादून स्थित राष्ट्रीय भारतीय सैन्य महाविद्यालय (आरआईएमसी) के कैडेट्स को संबोधित करते हुए उन्हें अपने संस्थान के आदर्शों का पालन करने और जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए बल और विवेक का विकास करने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ताकत और विवेक का संयोजन चुनौतीपूर्ण समय में अभेद्यता उत्पन्न करता है, जो जीवन की बड़ी जंग लड़ने में सहायक होता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश की सेवा गर्व और निर्भीकता के साथ करनी चाहिए और राष्ट्र के हित को हमेशा सर्वोपरि रखना चाहिए। उन्होंने कैडेट्स से अपील की कि वे अनुशासन, शिष्टाचार, और सहानुभूति के उदाहरण बनें, क्योंकि राष्ट्र का भविष्य उनके कंधों पर है। उन्होंने कहा, “भारत माता आपका इंतजार कर रही है। आपका आचरण अनुशासन, शिष्टाचार और सहानुभूति का उदाहरण होना चाहिए।”
RIMC के पूर्व छात्रों और समुदाय से उपराष्ट्रपति ने आग्रह किया कि वे एक थिंक टैंक के रूप में कार्य करें और युवाओं में राष्ट्रीयता की भावना का संचार करें। उन्होंने कहा कि उन लोगों के खिलाफ भी कदम उठाए जाने चाहिए, जो देश की अद्वितीय आर्थिक वृद्धि, विकास यात्रा, और वैश्विक मंच पर उन्नति को नहीं मानते।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा 10 दिसंबर 1962 को आरआईएमसी कैडेट्स को दिए गए भाषण की याद दिलाते हुए, उपराष्ट्रपति धनखड़ ने दोहराया कि “पृथ्वी बहादुरों की होती है, आत्मा में ताकत रखने वालों की होती है, आलसी और अक्षम लोगों की नहीं।” उन्होंने कैडेट्स से आग्रह किया कि वे आत्म-नियंत्रण और बलिदान के महान आदर्शों को जीवन में धारण करें और कठिनाइयों के समय भी खड़ा रहने की प्रेरणा लें।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि विफलता का भय विकास का सबसे बड़ा हत्यारा है और कैडेट्स से इसे सफलता की ओर एक कदम मानने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “डर की भावना आपकी प्रतिभा के उपयोग और आपके संभावनाओं की वास्तविकता में बाधा डालती है। हमेशा याद रखें, डर हमारे विकास की यात्रा का आवश्यक हिस्सा है।”
चंद्रयान मिशन की सफलता का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि चंद्रयान 2 की आंशिक सफलता के बाद चंद्रयान 3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग भारत की उपलब्धि है, जिससे देश ने वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
उपराष्ट्रपति ने आरआईएमसी और सैनिक स्कूलों में लड़कियों की भर्ती की सराहना की और इसे लिंग समानता और न्याय के लिए महत्वपूर्ण प्रगति बताया। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं लड़ाकू विमानों की पायलट हैं, अंतरिक्ष मिशनों की कमान संभाल रही हैं, और हर रुकावट को तोड़ रही हैं। साथ ही, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण को उन्होंने गेम चेंजर करार दिया।
इस अवसर पर उत्तराखंड के गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कॉलेज के कमांडेंट कर्नल राहुल अग्रवाल, कैडेट्स, शिक्षकगण और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

