विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को रोजगार मांगने वाला नहीं, रोजगार सृजक बनाए: प्रो. सुरेखा डंगवाल

देहरादून। दून विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग में विद्यार्थियों के लिए देवभूमि उद्यमिता योजना के अंतर्गत एकदिवसीय उद्यमिता अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखंड सरकार की इस पहल का क्रियान्वयन भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम में अर्थशास्त्र विभाग के 42 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।
दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों का दायित्व विद्यार्थियों को केवल रोजगार प्राप्त करने के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उनमें नेतृत्व, नवाचार और उद्यम सृजन की क्षमता विकसित करना भी है। उन्होंने कहा कि दून विश्वविद्यालय विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता और समस्या समाधान की क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि वे उत्तराखंड के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम का आयोजन अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष प्रो. राजेंद्र ममगाईं के मार्गदर्शन में किया गया। दून विश्वविद्यालय के देवभूमि उद्यमिता योजना के नोडल अधिकारी डॉ. सुधांशु जोशी ने कहा कि उद्यमिता समस्याओं की पहचान करने, नवाचारी समाधान विकसित करने तथा सामाजिक एवं आर्थिक मूल्य सृजित करने की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने विचारों को सतत एवं प्रभावी उद्यमों में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक जागरूकता, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास प्रदान किया जा रहा है।
अर्थशास्त्र विभाग के डॉ. अंकित नागर ने कहा कि उचित प्रशिक्षण, परामर्श और संस्थागत सहयोग के माध्यम से विद्यार्थियों के नवाचारी विचारों को सफल स्टार्टअप और स्वरोजगार की पहल में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को उद्यमिता के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
अभिमुखीकरण सत्र का संचालन देवभूमि उद्यमिता योजना की परियोजना अधिकारी सपना नेगी ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों को उद्यमशील मानसिकता विकसित करने, व्यावसायिक अवसरों की पहचान करने, स्टार्टअप शुरू करने, स्वरोजगार तथा उपलब्ध संस्थागत सहायता के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की और उद्यमिता एवं स्टार्टअप विकास के प्रति अपनी रुचि व्यक्त की।
