देवभूमि परिवार कानून के विरोध में आंदोलनकारी मंच का धरना 28 जून को

उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच की बैठक में सरकार के नए प्रावधानों पर जताई आपत्ति, मूल निवासियों के हितों की सुरक्षा की उठाई मांग
देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच की एक आवश्यक बैठक गुरुवार को शहीद स्मारक, देहरादून में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता श्रीमती पुष्पलता सिलमाना ने की तथा संचालन केशव उनियाल द्वारा किया गया। बैठक में हाल ही में लागू किए गए देवभूमि परिवार कानून के कुछ प्रावधानों पर चर्चा करते हुए मंच ने इसका विरोध जताया।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कानून के तहत 15 वर्ष निवास करने वाले व्यक्तियों को भी देवभूमि परिवार पहचान दिए जाने का प्रावधान मूल निवासियों के अधिकारों और हितों को प्रभावित कर सकता है। मंच से जुड़े वक्ताओं ने सरकार से इस विषय पर पुनर्विचार करने की मांग की।
सांस्कृतिक मोर्चा की अध्यक्ष सुलक्षणा भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड की मूल भावना और यहां के मूल निवासियों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने प्रदेश में बाहरी लोगों के सत्यापन और जनसांख्यिकीय संतुलन जैसे मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की।
बैठक में वक्ताओं ने आशंका जताई कि यदि वर्तमान स्वरूप में कानून लागू रहा तो भविष्य में मूल निवासियों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस विषय पर व्यापक जनचर्चा और सुझाव लेने की भी मांग की गई।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि देवभूमि परिवार कानून के विरोध में 28 जून को देहरादून स्थित परेड ग्राउंड (दीनदयाल पार्क) में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
बैठक में अरुणा थपलियाल, जगमोहन नेगी, केशव उनियाल, संगीता रावत, चंद्रकिरण राणा, सुशील चमोली, सुभोधिनी भट्ट, आशा नौटियाल, मनोज नौटियाल, विनोद असवाल, देवेंद्र भट्ट, शांति खत्री सहित कई आंदोलनकारी एवं संगठन पदाधिकारी उपस्थित रहे।

