नशीली दवाओं पर सख़्त प्रहार: कोडीन युक्त कफ सिरप के निर्माण पर एफएसडीए की बड़ी कार्रवाई
देहरादून।खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग, उत्तराखण्ड ने सचिव स्वास्थ्य एवं आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन सचिन कुर्वे के दिशा-निर्देशों एवं मार्गदर्शन में अवैध, घटिया तथा दुरुपयोग की आशंका वाली औषधियों के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जन स्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और औषधि गुणवत्ता, लाइसेंस शर्तों एवं वैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन पर किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
इसी क्रम में औषधि निरीक्षक शाखा द्वारा एक औषधि निर्माण इकाई का गहन निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान सिरप निर्माण प्रक्रिया, कच्चे माल की गुणवत्ता, भंडारण व्यवस्था, अभिलेखों के रख-रखाव तथा निर्धारित मानकों की विस्तार से जांच की गई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि संबंधित फर्म द्वारा निर्मित कुछ औषधियां गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई गईं, जो जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न कर सकती थीं।
गंभीर अनियमितताओं को दृष्टिगत रखते हुए विभाग द्वारा कोडीन युक्त कफ सिरप के विनिर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई। साथ ही संबंधित औषधि का अनुज्ञापन अग्रिम आदेशों तक निलंबित कर दिया गया। विभाग ने कहा कि औषधियों के निर्माण और आपूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है, इसलिए ऐसे मामलों में सख़्त कार्रवाई अनिवार्य है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन का स्पष्ट रुख है कि औषधि गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। विशेष रूप से कोडीन युक्त कफ सिरप जैसी मनःप्रभावी औषधियों के संभावित दुरुपयोग को देखते हुए निगरानी एवं प्रवर्तन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। विभाग का मानना है कि सख़्त नियंत्रण और निरंतर निगरानी से ही नशीली दवाओं के दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
प्रवर्तन के साथ-साथ न्यायिक मोर्चे पर भी विभाग को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। जनपद नैनीताल में एन.डी.पी.एस. अधिनियम के तहत वर्ष 2019 एवं 2020 में दर्ज मामलों में माननीय सत्र न्यायालय द्वारा 04 अभियुक्तों को 12 वर्ष की कठोर कारावास की सजा तथा ₹1,20,000 के जुर्माने से दंडित किया गया है। यह निर्णय अवैध नशीली दवाओं के कारोबार में संलिप्त तत्वों के लिए कड़ा संदेश है।
सचिव/आयुक्त के निर्देश पर राज्य के सभी जनपदों के औषधि अधिकारियों को कोडीन सिरप एवं अन्य मनःप्रभावी औषधियों के दुरुपयोग की रोकथाम हेतु विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं, निर्माण इकाइयों एवं वितरण नेटवर्क पर नियमित एवं आकस्मिक निरीक्षण तेज़ कर दिए गए हैं।
निगरानी, प्रवर्तन और जागरूकता पर समान ज़ोर
अवैध दवाओं के नेटवर्क को जड़ से समाप्त करने के लिए विभाग निगरानी, प्रवर्तन और जन-जागरूकता—तीनों स्तंभों पर एक साथ कार्य कर रहा है। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे केवल अधिकृत मेडिकल स्टोर्स से ही औषधियां खरीदें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना विभाग को दें।
अपर आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (उत्तराखण्ड) ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता जनता को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और मानक अनुरूप औषधियां उपलब्ध कराना है। औषधि गुणवत्ता से समझौता सीधे जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। कोडीन युक्त कफ सिरप एवं अन्य मनःप्रभावी औषधियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। जहां भी अनियमितता या अवैध गतिविधि पाई जाएगी, वहां बिना किसी दबाव के सख़्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
