सरकार को सिर्फ विधायकों की सुख-सुविधाओं की चिंता, उपनलकर्मियों के भविष्य की नहीं: जन संघर्ष मोर्चा
विकासनगर ।जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उपनलकर्मियों के नियमितीकरण और अन्य लाभों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर कर सरकार ने अपने विवेकहीन रवैये को फिर उजागर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि 15 अक्टूबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की एसएलपी खारिज कर दी थी, इसके बावजूद सरकार ने रिव्यू पिटीशन दायर कर सरकारी खजाने की बर्बादी की। सरकार एक-एक सुनवाई पर 20 लाख रुपये प्राइवेट वकीलों पर लुटा रही है, लेकिन उपनलकर्मियों के लिए पैसे की कमी का रोना रो रही है।
नेगी ने कहा कि 12 नवंबर 2018 को हाईकोर्ट ने उपनलकर्मियों के नियमितीकरण के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और हार गई। अब फिर रिव्यू पिटीशन के नाम पर कर्मियों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 10-15 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे उपनलकर्मी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, लेकिन सरकार को उनकी कोई फिक्र नहीं। सरकार जब कर्मियों को देने की बात आती है तो वित्तीय संकट का बहाना बनाती है, लेकिन विधायकों की सुख-सुविधाओं के लिए कोई कंजूसी नहीं दिखती।
नेगी ने विधायकों और मंत्रियों से अपील की कि अगर उनमें थोड़ी भी शर्म बाकी है तो वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान कर उपनलकर्मियों के हक की लड़ाई में सरकार को जगाने का काम करें।
पत्रकार वार्ता में – मोर्चा महासचिव आकाश पंवार और प्रवीण शर्मा पिन्नी मौजूद रहे।

