उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच ने जिलाधिकारी देहरादून को ‘मित्र सम्मान’ से किया सम्मानित
देहरादून।उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच द्वारा राज्य स्थापना दिवस 16 नवम्बर के अवसर पर हर वर्ष समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को “मित्र सम्मान” से सम्मानित किया जाता है। इसी क्रम में इस वर्ष जिलाधिकारी देहरादून को सम्मानित किया जाना निर्धारित था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राज्य स्थापना दिवस कार्यक्रम में आगमन के कारण व्यस्तता के बाद आज प्रातः 11:30 बजे जिलाधिकारी शहीद स्मारक सभागार पहुंचे। यहां सभी राज्य आंदोलनकारियों ने खड़े होकर तालियों से उनका स्वागत किया। पुष्पलता सिलमाणा, द्वारिका बिष्ट, सत्या पोखरियाल और विजयलक्ष्मी गुसाईं ने जिलाधिकारी को पुष्पगुच्छ भेंट किया। इसके बाद जगमोहन सिंह नेगी, डॉ. अतुल शर्मा, रविन्द्र जुगरान, पृथ्वी सिंह नेगी और वेदा कोठारी ने उन्हें शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
बैठक का संचालन प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती ने किया। उन्होंने जिलाधिकारी द्वारा समाज हित में किए जा रहे कार्यों और उनकी कार्यशैली के सकारात्मक प्रभाव की चर्चा की। प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने कहा कि आंदोलन से लेकर राज्य निर्माण तक कई अधिकारियों को देखा, लेकिन जिलाधिकारी देहरादून ने अपने निर्णयों और कार्यों से शहर में जनमानस के बीच विशेष स्थान बनाया है। मुख्यमंत्री द्वारा देहरादून को एक सक्षम अधिकारी देने से जनता के साथ-साथ सरकार की छवि को भी मजबूती मिली है।
पूर्व राज्य मंत्री रविन्द्र जुगरान ने जिलाधिकारी की सराहना करते हुए कहा कि उनके सोमवार जनता दरबार से सैकड़ों लोग प्रतिदिन लाभान्वित हो रहे हैं, चाहे बुजुर्गों की सहायता हो, दिव्यांगों की मदद, अनाथों की सुनवाई या आपदा के समय की त्वरित कार्रवाई—जिलाधिकारी ने अपने कार्यों से मिसाल पेश की है।
अपने संबोधन में जिलाधिकारी ने मित्र सम्मान हेतु मंच का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कार्य करना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है और वरिष्ठों व जनप्रतिनिधियों से मिला मार्गदर्शन ही उन्हें प्रेरित करता है। उन्होंने कहा, “मैं 1994 के उस दौर को समझ सकता हूं, जब आप अपने बच्चों को छोड़कर संघर्ष करते हुए जेलों तक गए, उसी का परिणाम आज पृथक उत्तराखण्ड राज्य है।”
प्रदेश प्रवक्ता महासचिव रामलाल खंडूड़ी और युद्धवीर सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री द्वारा राज्य स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर की गई घोषणाओं को शीघ्र शासनादेश के रूप में जारी करने तथा लंबित सम्मान पत्र सभी राज्य आंदोलनकारियों तक पहुंचाने की मांग की। पृथ्वी सिंह नेगी, केशव उनियाल और धर्मपाल रावत ने चिन्हीकरण नियमों में शिथिलता की मांग की, ताकि बुजुर्ग मातृशक्ति को न्याय मिल सके।
बैठक में बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से— डा. अतुल शर्मा, केशव उनियाल, रविन्द्र जुगरान, जगमोहन सिंह नेगी, देवी गोदियाल, अधिवक्ता पृथ्वी सिंह नेगी, वेदा कोठारी, रामलाल खंडूड़ी, प्रदीप कुकरेती, विशम्भर दत्त बौठियाल, पूरण सिंह लिंगवाल, जबर सिंह बर्तवाल, द्विज बहुगुणा, युद्धवीर सिंह चौहान, सुरेश नेगी, मोहन खत्री, चन्द्रकिरण राणा, शैलेश सेमवाल, धर्मपाल रावत, पुष्पलता सीलमाणा, सत्या पोखरियाल, द्वारिका बिष्ट, विजयलक्ष्मी गुसाईं, गुरदीप कौर, कमला भट्ट, राधा तिवारी, रामेश्वरी नेगी, अरुणा थपलियाल, राजेश्वरी परमार, सुमित थापा, विनोद असवाल, मनमोहन नेगी, हरी सिंह मेहर, धर्मानंद भट्ट, सतेन्द्र नौगाँई, साबी नेगी, प्रभात डण्डरियाल, विजय बलूनी, सुशील चमोली, नरेन्द्र नौटियाल, संगीता रावत, हरजिंदर सिंह, मोहन थापा, देवेश्वरी गुसाईं, राम पाल, लताफत हुसैन, सूफी खलिक अहमद, संजय शर्मा, सुदेश मंत्री, गणेश डंगवाल, सुनील जुयाल, बुद्धिराम रतूड़ी, जयेंद्र सेमवाल, दीपक बिष्ट, राकेश काण्डपाल, लक्ष्मी बिष्ट, रामेश्वरी रावत सहित अनेक आंदोलनकारी शामिल रहे।
