उत्तराखंड STF की साइबर पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के मास्टरमाइंड को किया गिरफ्तार

उत्तराखंड STF की साइबर पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के मास्टरमाइंड को किया गिरफ्तार
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देहरादून।उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की साइबर थाना कुमाऊं पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट ठगी के मास्टरमाइंड को आगरा, उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया है। आरोपी व्हाट्सएप और स्काइप के जरिए लोगों को धमकाकर मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाने की बात कहकर ठगी करता था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ नवनीत सिंह ने बताया कि नैनीताल निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर साइबर पुलिस ने इस बड़े गिरोह का खुलासा किया है।

दिसंबर 2024 में पीड़ित को अज्ञात नंबरों से कॉल कर उसके आधार कार्ड से सिम जारी होने और अवैध लेनदेन में इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई थी। इसके बाद स्काइप पर खुद को RBI और CBI अधिकारी बताकर नोटिस भेजे गए। पीड़ित को लगभग 18 दिनों तक वीडियो कॉल पर डिजिटल रूप से बंधक बनाकर रखा गया और किसी से संपर्क नहीं करने का दबाव डाला गया। इस दौरान ठगों ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 47 लाख रुपये जमा करवा लिए।

एसटीएफ ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन कुमाऊं के प्रभारी निरीक्षक अरुण कुमार के नेतृत्व में जांच शुरू की। पुलिस टीम ने विभिन्न बैंक खातों, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप और स्काइप डेटा का विश्लेषण कर आरोपी की पहचान की। आरोपी अमन कुशवाहा (निवासी: गोकुलपुरा, आगरा, यूपी) को कमिश्नरेट थाना लोहामंडी, आगरा से गिरफ्तार किया गया। उसके पास से एक मोबाइल फोन, एक सिम कार्ड और एक आधार कार्ड बरामद हुआ।

साइबर अपराधी व्हाट्सएप/स्काइप के जरिए वीडियो कॉल कर खुद को सरकारी अधिकारी बताते थे। पीड़ित को आधार कार्ड से जुड़ी सिम का गलत इस्तेमाल होने की बात कहकर डराया जाता था। फिर RBI और CBI के नाम से स्काइप पर फर्जी नोटिस भेजे जाते थे। पीड़ित को डिजिटल रूप से बंधक बनाकर किसी से संपर्क नहीं करने दिया जाता था। धमकाकर अलग-अलग खातों में बड़ी रकम जमा कराई जाती थी। ठग फर्जी खातों में पैसा ट्रांसफर कर उसे ठिकाने लगा देते थे।

प्रारंभिक जांच में पता चला कि आरोपी के बैंक खाते से एक महीने में लाखों रुपये का ट्रांजैक्शन हुआ। इसके अलावा, उसके खिलाफ पंजाब, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड में साइबर अपराध के तीन केस दर्ज हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात कॉल, व्हाट्सएप मैसेज या स्काइप कॉल में आए लालच और धमकियों में न आएं। किसी अज्ञात व्यक्ति को अपने दस्तावेज न दें। फर्जी निवेश योजनाओं, यूट्यूब लाइक स्कैम, और टेलीग्राम आधारित इन्वेस्टमेंट वेबसाइट से बचें। यदि कोई अजनबी खुद को पुलिस, वकील या सरकारी अधिकारी बताकर कॉल करे, तो उसकी बातों पर विश्वास न करें। साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें। यदि आपको किसी भी प्रकार का संदेह हो तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं।

देवभूमि खबर

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