आंदोलनकारी मंच ने मुजफ्फरनगर गोली काण्ड पर आधारित रक्त रंजीत फिल्म बनाने पर जयदीप भट्टाचार्य व उनकी टीम को दी बधाई

आंदोलनकारी मंच ने मुजफ्फरनगर गोली काण्ड पर आधारित रक्त रंजीत फिल्म बनाने पर जयदीप भट्टाचार्य व उनकी टीम को दी बधाई
Spread the love

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी व जिला अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती ने उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन में 02-अक्टूबर क़ी घटना पर मुजफ्फरनगर गोली काण्ड पर आधारित रक्त रंजीत फिल्म बनाने पर जयदीप भट्टाचार्य व उनकी टीम को बधाई दी है। यह फिल्म फिल्म फेस्टिवल में चयन के उपरान्त रविवार को राजपुर रोड़ सिल्वर सिटी में दिखाया जायेगा।

डिजिटल टू प्रिंट मीडिया 2-अक्टूबर, 1994 की रात रामपुर तिराहे पर आधारित है फिल्म- पुलिस की गोली में कई आंदोलनकारी मारे गये थे इस घटना में। यह फिल्म दून में होने वाले एक फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित की जाएगी । इस फिल्म के निर्माता निर्देशक जयदेव भट्टाचार्य के सिनेमेटोग्राफर के रूप में किये गये काम की भी प्रशंसा की जा रही है।


जयदीप भट्टाचार्य फिल्म निर्माता ने बताया सोशल मीडिया पर छाई हुई इस फिल्म को लेकर उन्होंने बताया कि इस फिल्म में उस रात हुए रक्तपात के गवाह कई आंदोलनकारियों के साथ ही रामपुर तिराहा के आसपास के गांवों के उन लोगों की बातचीत को शामिल किया गया है, जिन्होंने उस रात आंदोलनकारियों को सहारा दिया था। ऐसे बनी फिल्म कई गढ़वाली फीचर फिल्मों और गीतों के पिक्चराइजेशन में सिनेमेट्रोग्राफर के रूप में काम कर चुके जयदेव भट्टाचार्य के अनुसार दो वर्ष पहले देहरादून में जन संवाद समिति संस्था का एक कार्यक्रम था।


इस कार्यक्रम में रामपुर तिराहा पर उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों को अपनी जमीन दान करने वाले रामपुर गांव के महावीर सिंह को सम्मानित करने का फैसला किया गया। उन्हें निमंत्रण देने के लिए समिति के पदाधिकारी और राज्य आंदोलनकारी जयदीप सकलानी मुजफ्फरनगर जा रहे थे तो भट्टाचार्य भी अपना कैमरा लेकर साथ चल दिये. वहां जाकर उन्होंने उन जगहों की वीडियो फुटेज लेनी शुरू की जहां यह जघन्य बर्बरता हुई थी. इसके बाद कई ऐसे लोग मिले जिन्होंने उस रात बर्बरता कि शिकार आंदोलनकारियों को सहारा दिया था। वहां क़ी जनता के दरवाजे भी आंदोलनकारियों क़ी मदद के लिए खोल दिये गये थे। गांवों में आंदोलनकारियों के न सिर्फ सामूहिक रूप से भोजन तैयार किया गया, बल्कि ग्रामीण अपनी-अपनी सीमाओं पर पहरा देने के लिए बैठ गये, ताकि पुलिस आंदोलनकारियों को तलाशने गांवों के भीतर न आए।

देवभूमि खबर

Related articles