उत्तराखंड के सरकारी चिकित्सक आंदोलन के मूड में, 12 अप्रैल से काली पट्टी बांधकर करेंगे कार्य, 25 अप्रैल से कार्य बहिष्कार की चेतावनी
देहरादून।उत्तराखंड के सरकारी चिकित्सकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की राह पकड़ ली है। चिकित्सकों द्वारा सामूहिक निर्णय लिया गया है कि 12 अप्रैल 2025 से प्रदेश भर के सभी सरकारी चिकित्सक अपने-अपने कार्य क्षेत्रों में काली पट्टी बांधकर दो सप्ताह तक कार्य करेंगे। चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि यदि इन 14 दिनों में भी सरकार द्वारा उनकी मांगों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो 25 अप्रैल से समस्त चिकित्सक कार्य बहिष्कार पर चले जाएंगे।
हालांकि, पोस्टमार्टम, चारधाम यात्रा ड्यूटी व आकस्मिक सेवाओं को इस कार्य बहिष्कार से मुक्त रखा जाएगा। इसके अतिरिक्त, चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि यदि कार्य बहिष्कार के बावजूद सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो 5 मई 2025 को सभी विशेषज्ञ चिकित्सक महामहिम राज्यपाल को सामूहिक रूप से त्यागपत्र भेज देंगे तथा राज्य की समस्त सरकारी चिकित्सा सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।
चिकित्सकों का कहना है कि टिहरी, अल्मोड़ा, नैनीताल और मसूरी जैसे क्षेत्रों को दुर्गम से हटाकर सुगम क्षेत्र घोषित कर दिया गया है, जबकि पूर्व में इन्हें दुर्गम माना जाता था। इस विषय पर पुनः दुर्गम क्षेत्र में शामिल करने का वादा किया गया था, जो अभी तक अधूरा है। इसके अतिरिक्त, एसडीएसीपी में शिथिलीकरण का लाभ भी विगत छह माह से नहीं मिल पाया है, जबकि इसका शासनादेश पूर्व में जारी होता रहा है।
संघ का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री और सचिव द्वारा चिकित्सकों की तीन प्रमुख मांगों — एसडीएसीपी, डीपीसी आदेश और दंत चिकित्सकों का समायोजन — पर सहमति दी जा चुकी है, लेकिन दो वर्षों से आंदोलनरत चिकित्सकों को अब तक कोई ठोस शासनादेश नहीं मिला। चिकित्सकों ने दो बार आंदोलन स्थगित किया, परंतु आश्वासन के बाद भी निराशा ही हाथ लगी। अब संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस बार भी शासनादेश नहीं आया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
चिकित्सकों ने शासन से अपील की है कि वे इस विषय को गंभीरता से लें और शीघ्र निर्णय लें, ताकि प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित न हो।

