उत्तराखण्ड में विद्युत दरों में मामूली वृद्धि, फिर भी देश के अन्य राज्यों की तुलना में सस्ती बिजली: यूपीसीएल
देहरादून। उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिए राज्य में विद्युत दरों में केवल 5.62 प्रतिशत की वृद्धि अनुमोदित की गई है। जबकि यूपीसीएल द्वारा प्रस्तावित वृद्धि 12.01 प्रतिशत थी, परंतु विद्युत नियामक आयोग ने इसे काफी कम कर दिया है। इसमें भी यूपीसीएल को वास्तविक रूप से केवल 0.10 प्रतिशत की वृद्धि ही प्राप्त हुई है, शेष राशि यूजेवीएनएल और पिटकुल जैसी संस्थाओं के लंबित बकाया के भुगतान हेतु जोड़ी गई है।
यूपीसीएल ने बताया कि अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखण्ड में घरेलू, वाणिज्यिक, कृषि एवं औद्योगिक श्रेणियों की विद्युत दरें अब भी काफी कम हैं। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए उत्तराखण्ड में प्रति यूनिट दर ₹6.16 है, जबकि यही दर महाराष्ट्र में ₹9.47 और बिहार में ₹8.62 प्रति यूनिट है। कृषि उपभोक्ताओं के लिए यह दर उत्तराखण्ड में मात्र ₹2.86 प्रति यूनिट है, जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे कम है। छोटे उद्योगों के लिए भी उत्तराखण्ड की दर ₹8.23 प्रति यूनिट है, जबकि बिहार में यह ₹16.03 प्रति यूनिट है।
इस वर्ष विद्युत नियामक आयोग ने कृषि श्रेणी को छोड़कर किसी भी श्रेणी के डिमांड या फिक्स चार्ज में कोई वृद्धि नहीं की है। बीपीएल उपभोक्ताओं पर भी न्यूनतम भार डाला गया है और केवल ₹0.10 प्रति यूनिट की मामूली वृद्धि की गई है। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप, हिमआच्छादित क्षेत्रों में 200 यूनिट तक और अन्य क्षेत्रों में 100 यूनिट तक खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है।
यूपीसीएल की उपलब्धियों की बात करें तो वितरण क्षेत्र की राष्ट्रीय रैंकिंग में यह विशेष श्रेणी में देश का दूसरा सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला डिस्कॉम बनकर उभरा है। उपभोक्ता सेवा रेटिंग में भी उत्तराखण्ड ने मणिपुर के साथ संयुक्त रूप से पहला स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा पीएम सूर्यघर योजना के तहत अब तक प्रदेश में 14182 रूफ टॉप सोलर संयंत्र लगाए जा चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 50 मेगावाट है। इस योजना में उल्लेखनीय कार्यों के लिए केंद्र सरकार द्वारा यूपीसीएल को ₹9.47 करोड़ का प्रोत्साहन भी दिया गया है।
राज्य की बुक्सा और राजी जनजातियों के 669 घरों का विद्युतीकरण कर उन्हें संतृप्त घोषित किया गया है। भारत नेट परियोजना के अंतर्गत 697 पंचायत घरों को शत-प्रतिशत विद्युत कनेक्टिविटी प्रदान की गई है। यूपीसीएल ने लगातार तीन वर्षों से रिकॉर्ड राजस्व अर्जित किया है, जिसमें वित्तीय वर्ष 2024-25 में ₹10,610 करोड़ की प्राप्ति हुई। वहीं एटीएण्डसी हानियों को राष्ट्रीय औसत 16.30 प्रतिशत से घटाकर उत्तराखण्ड में 14.64 प्रतिशत तक लाया गया है, जिसे इस वर्ष 14.55 प्रतिशत करने का लक्ष्य है।
बेहतर पावर पर्चेज प्रबंधन के चलते अब तक ₹400 करोड़ से अधिक की बचत की जा चुकी है, जिसका लाभ उपभोक्ताओं को एफपीपीसीए (Fuel Power Purchase & Cost Adjustment) के जरिए दिया गया है। इसके अतिरिक्त, देहरादून शहर में विद्युत लाइनों को भूमिगत करने की योजना भी तेजी से चल रही है। स्मार्ट मीटर परियोजना के अंतर्गत 16.49 लाख उपभोक्ताओं के परिसरों में मीटर लगाए जाने की प्रक्रिया जारी है, जिसके लिए गढ़वाल में जीनस और कुमाऊं में अदाणी को कार्य सौंपा गया है।
प्रदेश भर में 268 उपसंस्थानों की निगरानी RT-DAS प्रणाली से हो रही है और 90 उपसंस्थानों में आधुनिक ऑटोमेटेड डिमांड रिस्पांस सिस्टम (ADRS) लगाया जा रहा है, जिससे ग्रिड ओवरड्रॉल पर नियंत्रण संभव होगा। इसके अलावा यूपीसीएल की मीटर टेस्ट प्रयोगशालाओं को NABL सर्टिफिकेट और कॉर्पोरेट ऑफिस को ISO 9001:2015 प्रमाणन प्राप्त हुआ है।
यूपीसीएल को “द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया” द्वारा विद्युत वितरण क्षेत्र में उत्कृष्ट लागत प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किया गया है। साथ ही वर्ष 2024 की गर्मियों में रिकॉर्ड 2863 मेगावॉट की विद्युत मांग के बावजूद राज्य में कहीं भी शिड्यूल रोस्टिंग नहीं की गई, जो यूपीसीएल की प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है।

