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देहरादून में 80 फीट ऊंचे रावण का भव्य दहन, एलईडी और लेजर लाइटों से जगमगाए पुतले

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देहरादून। श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून की ओर से रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान में आयोजित भव्य रामलीला महोत्सव-2026 के अंतर्गत दशहरा पर्व श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर उत्तराखंड में पहली बार एलईडी और लेजर लाइटों से सजे 80 फीट ऊंचे रावण तथा 65-65 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का भव्य दहन किया गया। इसके साथ ही लंका के पुतले का भी दहन हुआ। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक धार्मिक आस्था के संगम ने दर्शकों को आकर्षित किया।

पुतला दहन से पूर्व आयोजित सांस्कृतिक संध्या में उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और लोककलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। स्थानीय एवं क्षेत्रीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश की। रंगारंग कार्यक्रमों ने दशहरा महोत्सव की भव्यता को और बढ़ा दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि दशहरा पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला धरोहर को देहरादून में पुनर्जीवित कर उसे उत्तराखंड सहित देशभर में पहचान दिलाना ऐतिहासिक उपलब्धि है। आज इस रामलीला की गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है, जो उत्तराखंडवासियों के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन सनातन संस्कृति और प्रदेश की समृद्ध लोकपरंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि वर्ष 1952 से पुरानी टिहरी में आयोजित होने वाली ऐतिहासिक रामलीला टिहरी बांध के निर्माण के बाद पुरानी टिहरी के जलमग्न होने से विस्थापन की पीड़ा से जुड़ी रही है। इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर को देहरादून में पुनर्जीवित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना समिति का संकल्प रहा है। आज यह रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और विरासत का प्रतीक बन चुकी है।

देवभूमि खबर

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