माणा हिमस्खलन: सर्च और रेस्क्यू अभियान पूरा, 46 श्रमिक सुरक्षित, 8 की मौत
चमोली। माणा क्षेत्र में 28 फरवरी को हुए हिमस्खलन में फंसे श्रमिकों के लिए चलाया गया सर्च और रेस्क्यू अभियान 02 मार्च को पूरा हो गया। इस आपदा में कुल 54 श्रमिक प्रभावित हुए, जिनमें से 46 को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि 8 श्रमिकों की मौत हो गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अभियान में भारतीय सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बीआरओ, पुलिस, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और अन्य एजेंसियों की तत्परता और साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
28 फरवरी की सुबह 8:30 बजे माणा गेट के पास बीआरओ कैंप में कार्यरत श्रमिक हिमस्खलन में फंस गए। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 55 श्रमिक बताए गए थे, लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि 1 श्रमिक पहले ही घर लौट चुका था, जिससे वास्तविक संख्या 54 हो गई। इस घटना में 46 श्रमिकों को सुरक्षित निकाला गया, जबकि 8 श्रमिकों की मौत हो गई। जोशीमठ स्थित सेना अस्पताल में 44 श्रमिकों का उपचार चल रहा है, जबकि 2 श्रमिक एम्स ऋषिकेश में भर्ती हैं, जिनकी हालत स्थिर है।
रेस्क्यू ऑपरेशन को युद्धस्तर पर संचालित किया गया। 02 मार्च को व्यापक स्तर पर तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें 4 श्रमिकों के शव बरामद हुए, जबकि 4 शव पहले ही मिल चुके थे। कुल 8 मृतक श्रमिकों के शव बरामद किए गए, जिनमें से 7 का पोस्टमार्टम कर उनके पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिए गए हैं। बदरीनाथ/माणा से सुरक्षित निकाले गए 46 श्रमिकों को ज्योतिर्मठ स्थित सेना अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है और सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
रेस्क्यू अभियान को तेज करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों और संसाधनों का उपयोग किया गया। जॉलीग्रांट एयरपोर्ट से ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) को एमआई-17 हेलीकॉप्टर द्वारा घटनास्थल तक पहुंचाया गया। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ द्वारा थर्मल इमेजिंग कैमरा, विक्टिम लोकेटिंग कैमरा, एवलांच रॉड और डॉग स्क्वाड की मदद से व्यापक खोज अभियान चलाया गया। वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर, तीन चीता हेलीकॉप्टर, उत्तराखंड सरकार के दो हेलीकॉप्टर और एम्स ऋषिकेश से एक एयर एंबुलेंस भी राहत कार्य में शामिल किए गए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरे अभियान की स्वयं निगरानी की। उन्होंने चार बार एसईओसी पहुंचकर सर्च एवं रेस्क्यू कार्यों की समीक्षा की, ज्योर्तिमठ जाकर राहत कार्यों का निरीक्षण किया और पूरे क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण भी किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए हिमस्खलन निगरानी और अलर्ट सिस्टम विकसित किया जाए।
सरकार ने आश्वासन दिया है कि गंभीर रूप से घायल श्रमिकों का पूरा इलाज राज्य सरकार द्वारा कराया जाएगा और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता दी जाएगी।

