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रुद्रप्रयाग में अतिवृष्टि और बादल फटने से भारी नुकसान, डीएम ने दिए त्वरित राहत-रेस्क्यू के निर्देश

रुद्रप्रयाग में अतिवृष्टि और बादल फटने से भारी नुकसान, डीएम ने दिए त्वरित राहत-रेस्क्यू के निर्देश
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रुद्रप्रयाग। जनपद रुद्रप्रयाग में बीते दिनों हुई अतिवृष्टि एवं बादल फटने की घटनाओं ने कई गांवों में भारी तबाही मचाई है। कई मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए, दर्जनों मकानों में दरारें पड़ गईं, साथ ही खेतों में खड़ी फसलें बह गईं। सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से यातायात व्यवस्था भी बाधित हो गई है। कुछ स्थानों पर छोटे पुल और पैदल रास्ते तक टूटकर बह गए हैं। प्रारंभिक आंकलन के अनुसार अब तक 30 से अधिक मकान आंशिक या पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, वहीं 100 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि प्रभावित हुई है। कई ग्रामीण परिवार अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए हुए हैं।

इसी स्थिति की समीक्षा और राहत-रेस्क्यू कार्यों की गति बढ़ाने के लिए जिलाधिकारी प्रतीक जैन की अध्यक्षता एवं पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रल्हाद कोंडे की उपस्थिति में जिला मुख्यालय पर एक बैठक आयोजित हुई। बैठक में प्रभावित क्षेत्रों के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई और उन्हें त्वरित राहत एवं पुनर्वास कार्यों की जिम्मेदारी दी गई।

  • तालजामण क्षेत्र : मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, खंड विकास अधिकारी अगस्त्यमुनि, जिला समाज कल्याण अधिकारी एवं जिला उद्यान अधिकारी को दायित्व सौंपा गया।
  • छेनागाढ़ क्षेत्र : जिला पंचायत राज अधिकारी, सहायक अभियंता (ग्रामीण निर्माण विभाग), जिला आबकारी अधिकारी एवं जिला परियोजना अधिकारी (उरेड़ा) को नोडल अधिकारी बनाया गया।
  • देवल गांव क्षेत्र : महाप्रबंधक उद्योग विभाग एवं सहायक प्रबंधक उद्योग विभाग को जिम्मेदारी दी गई।
  • स्यूर क्षेत्र : उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी को नोडल अधिकारी नामित किया गया।

इस बीच एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, जिला पुलिस, फायर सर्विस और आपदा प्रबंधन टीमें मौके पर लगातार राहत व बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। कई जगहों पर मलबा हटाकर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया गया है।

अतिवृष्टि व बादल फटने की घटनाओं से प्रभावित क्षेत्रों के अलावा केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग सहित कई ग्रामीण मार्गों पर यातायात बाधित हुआ है। जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द सड़कें खोलकर यातायात सुचारु किया जाए, ताकि तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को राहत मिल सके।

देवभूमि खबर

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