वित्त आयोग की टीम से जन प्रतिनिधियों की मांग—राज्य को मिले अधिक वित्तीय सहायता, ग्रीन बोनस और क्षेत्र आधारित बजट
देहरादून। 16वें वित्त आयोग की टीम ने सोमवार को देहरादून में नगर निकायों, त्रिस्तरीय पंचायतों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से व्यापक विचार-विमर्श किया। बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया ने की। बैठक में राज्य के जनप्रतिनिधियों ने पर्वतीय राज्यों की विशेष जरूरतों को देखते हुए अधिक वित्तीय आवंटन, ग्रीन बोनस और स्थानीय समस्याओं को हल करने के लिए क्षेत्र विशेष पर आधारित फंडिंग की मांग रखी।
प्रथम सत्र में आठ नगर निकाय प्रमुखों ने शहरों की चुनौतियों जैसे पार्किंग, सीवरेज, साफ-सफाई आदि के लिए अतिरिक्त वित्तीय मदद की मांग की। देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल, रुद्रपुर के मेयर विकास शर्मा, अल्मोड़ा के मेयर अजय वर्मा, हरिद्वार की मेयर किरण जैसल, मसूरी की अध्यक्ष मीरा सकलानी समेत अन्य प्रतिनिधियों ने तीर्थाटन, फ्लोटिंग आबादी और निर्माण लागत जैसी स्थानीय समस्याओं को रेखांकित किया।
दूसरे सत्र में त्रिस्तरीय पंचायतों के प्रतिनिधियों ने फंड आवंटन में क्षेत्रफल को मुख्य आधार बनाने की वकालत की। उन्होंने आपदा प्रबंधन, स्वच्छता, और आकस्मिक कार्यों के लिए विशेष बजट की आवश्यकता जताई। सचिव पंचायतीराज चंद्रेश कुमार ने बताया कि राज्य की 89% ग्राम पंचायतें 500 से कम आबादी वाली हैं, जिन्हें बेहद सीमित अनुदान मिलता है।
तीसरे सत्र में भाजपा, कांग्रेस, सीपीआई(एम), आम आदमी पार्टी और बसपा के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भाजपा विधायक विनोद चमोली और कांग्रेस के सूर्यकांत धस्माना ने राज्य की पर्यावरणीय भूमिका और आपदा संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए ग्रीन बोनस और विशेष सहायता की मांग की। साथ ही, पलायन, टेलीमेडिसिन, महिला उद्योग और जल संरक्षण जैसे मुद्दों को भी उठाया गया। अन्य दलों ने मनरेगा दरें बढ़ाने और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर सहयोग की मांग की।
बैठक में आयोग के सदस्य श्रीमती एनी जॉर्ज मैथ्यू, डॉ. मनोज पांडा, डॉ. सौम्या कांति घोष, सचिव ऋत्विक पांडे, तथा राज्य की ओर से सचिव वित्त दिलीप जावलकर, सचिव पंचायतीराज चंद्रेश कुमार, नगर आयुक्त नमामि बंसल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

