सूबे में 13 आदर्श संस्कृत ग्रामों की होगी विधिवत शुरुआत — डॉ. धन सिंह रावत

सूबे में 13 आदर्श संस्कृत ग्रामों की होगी विधिवत शुरुआत — डॉ. धन सिंह रावत
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देहरादून।उत्तराखंड में देववाणी संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “आदर्श संस्कृत ग्राम” अब औपचारिक रूप से शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार, 10 अगस्त को देहरादून के भोगपुर गांव से इस योजना का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर सभी 13 आदर्श संस्कृत ग्राम वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहेंगे।

संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार संस्कृत को जनभाषा बनाने और इसका गौरव पुनः स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक जिले में एक-एक आदर्श संस्कृत ग्राम का चयन किया गया है, जहां ग्रामीण आपसी वार्तालाप और कार्य संस्कृत में करेंगे। साथ ही वैदिक और पौराणिक ऋचाओं का पाठ, संस्कारों के अनुरूप परंपराओं का निर्वहन और सामाजिक व सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा।

डॉ. रावत ने यह भी कहा कि यह योजना सभ्य समाज के निर्माण, नशामुक्त वातावरण, नारी सम्मान, अपराध प्रवृत्ति रोकने और सांस्कृतिक जागरूकता फैलाने में सहायक होगी। यह परियोजना उत्तराखंड संस्कृत अकादमी और केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में संचालित की जाएगी।

यह योजना उत्तराखंड संस्कृत अकादमी और केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में संचालित की जाएगी। राज्य सरकार द्वारा चयनित आदर्श संस्कृत ग्रामों में नूरपुर पंजनहेड़ी (हरिद्वार), कोटगांव (उत्तरकाशी), डिम्मर (चमोली), बैंजी (रुद्रप्रयाग), मुखेम (टिहरी), भोगपुर (देहरादून), गोदा (पौड़ी), उर्ग (पिथौरागढ़), खर्ककार्की (चंपावत), सेरी (बागेश्वर), जैंती पाण्डेकोटा (अल्मोड़ा), पाण्डेगांव (नैनीताल) और नगला तराई (ऊधमसिंह नगर) शामिल हैं।

देवभूमि खबर

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