केंद्रीय बजट 2026–27 के प्री-बजट परामर्श में उत्तराखण्ड ने रखी पर्वतीय राज्यों की विशेष जरूरतें
देहरादून।केंद्रीय बजट 2026–27 के निर्माण की प्रक्रिया के अंतर्गत केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन की अध्यक्षता में राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ प्री-बजट परामर्श बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न राज्यों ने अपनी-अपनी विकास संबंधी प्राथमिकताओं और सुझावों को केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया।
उत्तराखण्ड की ओर से राज्य की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों, पारिस्थितिक संवेदनशीलता तथा राष्ट्र को प्रदान की जा रही महत्वपूर्ण इको-सिस्टम सेवाओं को ध्यान में रखते हुए एक विस्तृत मेमोरेंडम प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राज्य के प्रतिनिधि के रूप में नामित वन मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने बैठक में उत्तराखण्ड का पक्ष मजबूती से रखा।
बैठक में पर्वतीय एवं सीमांत क्षेत्रों के संतुलित विकास, रिवर्स पलायन को प्रोत्साहन, आधारभूत अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण, पर्यावरण संरक्षण तथा राज्य को क्लाइमेट रेजिलिएंट बनाने से जुड़े विषयों को प्रमुखता से रखा गया। साथ ही राज्य की विकास आवश्यकताओं के अनुरूप नई पहलों एवं मौजूदा योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया गया।
बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इसके चलते राज्यों को केंद्रीय करों में उनका अंश समय पर एवं अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में प्राप्त हो रहा है, जिससे उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्यों को विकास कार्यों में गति मिली है।
“स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट” के अंतर्गत प्राप्त सहायता को उत्तराखण्ड के लिए अत्यंत उपयोगी बताया गया, जिससे राज्य में पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
राज्य सरकार द्वारा सुशासन, जनकल्याण एवं सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन को प्राथमिकता दिए जाने की बात भी बैठक में रखी गई। सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में उत्तराखण्ड का देश में प्रथम स्थान प्राप्त करना राज्य के निरंतर प्रयासों का परिणाम बताया गया। हिमालयी राज्य होने के कारण उत्तराखण्ड की विकास संबंधी चुनौतियां मैदानी राज्यों से भिन्न हैं। विषम भौगोलिक परिस्थितियां, बिखरी बसावट और पारिस्थितिक संवेदनशीलता के कारण विकास की लागत अधिक होने की बात रखते हुए केंद्र-राज्य समन्वय को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
प्री-बजट कंसलटेशन में उत्तराखण्ड द्वारा प्रस्तुत प्रमुख मांगें व सुझाव:
- “स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट” को निरंतर जारी रखने का अनुरोध।
- फ्लोटिंग पॉपुलेशन को ध्यान में रखते हुए सतत पर्यटन हेतु नई केंद्र पोषित योजना।
- भू-जल स्तर में गिरावट रोकने के लिए विशेष अनुदान/नई योजना।
- मानव–वन्यजीव संघर्ष से फसलों की सुरक्षा हेतु क्लस्टर आधारित तारबंदी योजना।
- स्टेट डेटा सेंटर्स के सुदृढ़ीकरण के लिए केंद्र पोषित योजना।
- ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेलवे नेटवर्क के विस्तार हेतु नई रेललाइन सर्वेक्षण।
- जल जीवन मिशन के अनुरक्षण को भी केंद्र पोषित योजना में शामिल करने का अनुरोध।
- जल जीवन मिशन (शहरी) हेतु विशेष वित्तीय प्रावधान।
- दुर्गम क्षेत्रों में जल विद्युत परियोजनाओं के लिए ₹8,000 करोड़ की VGF।
- आपदा से हुई क्षति के पुनर्निर्माण हेतु SDRF से पूर्ण सहायता।
- वृद्धावस्था पेंशन में केंद्रांश वृद्धि पर विचार।
- आंगनवाड़ी कर्मियों के मानदेय में वृद्धि।
- आगामी कुंभ आयोजन के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड देश का “वॉटर टावर” है और राष्ट्र को महत्वपूर्ण इको-सिस्टम सेवाएं प्रदान करता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार से राज्य को निरंतर सहयोग मिल रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्रीय बजट 2026–27 उत्तराखण्ड की विकास यात्रा को नई गति देगा और विकसित भारत @2047 के संकल्प में राज्य की भूमिका को और सशक्त बनाएगा।

