धर्मयुक्त भक्ति ही महादेव को प्रिय, कर्तव्य से विमुख होकर की गई पूजा का कोई अर्थ नहीं: आचार्य महामाया प्रसाद

देहरादून। सरस्वती विहार विकास समिति के तत्वावधान में अजबपुर खुर्द स्थित शिव शक्ति मंदिर में आयोजित शिव महापुराण कथा के दशम दिवस पर आचार्य महामाया प्रसाद ने श्रद्धालुओं को धर्मयुक्त भक्ति और कर्तव्य पालन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि **धर्म के विरुद्ध की गई भक्ति भगवान शिव को प्रिय नहीं हो सकती।** सच्ची भक्ति वही है, जिसमें व्यक्ति अपने कर्तव्यों और धर्म का पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी से पालन करे।
आचार्य महामाया प्रसाद ने कहा कि शिव महापुराण में भगवान शिव माता भवानी से कहते हैं कि संसार में प्रत्येक व्यक्ति का अपना धर्म और कर्तव्य है। मां को अपने धर्म का पालन करना चाहिए, पिता को निष्ठा से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए तथा बेटा और बहू भी अपने-अपने दायित्वों को ईमानदारी से निभाएं। व्यक्ति जिस पद और प्रतिष्ठा पर है, उसे उसी के अनुरूप अपने धर्म एवं कर्तव्य का निष्ठापूर्वक पालन करते रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान भौतिकवादी दौर में व्यक्ति अपने कार्य और जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाने में पीछे रहता है, लेकिन समाज के सामने स्वयं को बड़ा भक्त साबित करने का प्रयास करता है। ऐसी भक्ति धर्म के अनुरूप नहीं है। **महादेव के लिए श्रेष्ठ भक्ति वही है, जिसमें पूजा के साथ जीवन में धर्म, कर्तव्य, सत्य और ईमानदारी का पालन हो।**
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि भगवान शिव की आराधना के साथ अपने पारिवारिक, सामाजिक और व्यावसायिक दायित्वों का भी पूरी निष्ठा से निर्वहन करें। यही सच्ची शिव भक्ति है।
इस अवसर पर समिति अध्यक्ष पंचम सिंह बिष्ट, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बीएस चौहान, उपाध्यक्ष कैलाश राम तिवारी, सचिव गजेंद्र भंडारी, मंदिर संयोजक मूर्ति राम बिज्जलवान, सह संयोजक दिनेश जुयाल, कोषाध्यक्ष विजय सिंह रावत सहित मंगल सिंह कुट्टी, जयप्रकाश सेमवाल, चिंतामणि पुरोहित, बसंत सिंह दफोनी, बीपी शर्मा, पीएल चमोली, जयपाल सिंह बर्तवाल, आशीष गुसाईं, आचार्य उदय प्रकाश नौटियाल, आचार्य सुशांत जोशी, आचार्य अखिलेश बधानी, कैलाश रमोला और वेद किशोर शर्मा आदि मौजूद रहे।

