गोवा में फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पी गई 4.20 करोड़ रुपये की संपत्ति ईडी ने की कुर्क

पणजी, 24 सितंबर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पणजी क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत गोवा के उत्तरी गोवा जिले में 4 करोड़ 20 लाख 51 हजार 486 रुपये मूल्य की अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। कुर्क की गई संपत्ति सोकोरो गांव के वड्डेम वार्ड, बारदेज तालुका स्थित सर्वे नंबर 210/5 की 5,000 वर्ग मीटर भूमि है। इसमें 4,086 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनाए गए 11 भूखंड और इन भूखंडों के लिए 914 वर्ग मीटर का साझा क्षेत्र शामिल है।
ईडी ने बताया कि धन शोधन की जांच पोर्वोरिम थाने में संपत्ति के मालिक के एक कानूनी उत्तराधिकारी की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई। प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता के तहत धोखाधड़ी, प्रतिरूपण कर धोखाधड़ी तथा जाली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करने जैसे अपराधों का उल्लेख है। मामले की जांच गोवा पुलिस की अपराध शाखा की विशेष जांच टीम द्वारा की जा रही है।
ईडी की जांच में सामने आया कि संपत्ति मूल रूप से शिकायतकर्ता के दिवंगत पिता के नाम पर थी। आरोप है कि सक्षम दीवानी न्यायालय में इन्वेंटरी कार्यवाही शुरू कर यह झूठा दावा किया गया कि पुणे में रहने वाली दो बहनों के पिता और संपत्ति के दिवंगत मालिक एक ही व्यक्ति थे। इस आधार पर प्राप्त न्यायालयीय आदेश के बाद संपत्ति के भूमि अभिलेखों में दोनों बहनों के नाम दर्ज करा दिए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि संपत्ति के संबंध में 17 फरवरी 2018 को दोनों बहनों और उनके पतियों से पावर ऑफ अटॉर्नी पहले ही सोकोरो निवासी एक व्यक्ति ने प्राप्त कर ली थी। इससे पहले 22 जनवरी 2018 को एक ऐसे व्यक्ति ने बैंकिंग माध्यम से एक बहन को 9 लाख रुपये भेजे थे, जिसने बाद में संपत्ति के कुछ भूखंड खरीदे। यह भुगतान पावर ऑफ अटॉर्नी बनने से पहले और उस इन्वेंटरी कार्यवाही से एक वर्ष से अधिक पहले किया गया था, जिसके माध्यम से संपत्ति का स्वामित्व स्थापित किया गया। ईडी के अनुसार इससे यह संकेत मिलता है कि संपत्ति की बिक्री की व्यवस्था और आंशिक भुगतान कथित तौर पर स्वामित्व अथवा बिक्री के अधिकार का कोई वैध आधार बनने से पहले ही कर दिया गया था।
इसके बाद बिना किसी नियोजन अनुमति के संपत्ति को 11 भूखंडों में विभाजित कर दिया गया। वर्ष 2018 से 2020 के बीच इन भूखंडों को नौ खरीदारों को बिचौलियों की श्रृंखला के माध्यम से बेचा गया। बिक्री विलेख पावर ऑफ अटॉर्नी धारक जॉन पॉल वालेस ने निष्पादित किए।
ईडी के अनुसार वर्ष 2018 में निष्पादित पांच बिक्री विलेखों में विक्रेताओं के पक्ष में स्वामित्व का आधार ऐसी इन्वेंटरी कार्यवाही से बताया गया था, जो उस समय तक हुई ही नहीं थी। बिक्री विलेखों में कुल 63 लाख 65 हजार रुपये का प्रतिफल दर्शाया गया, जबकि वास्तविक रूप से करीब 1 करोड़ 49 लाख 53 हजार रुपये का भुगतान किया गया। इसमें बड़ी राशि नकद तथा ऐसे चेक के माध्यम से दी गई, जिनमें प्राप्तकर्ता का नाम खाली छोड़ा गया था। बेचे गए भूखंडों का उचित बाजार मूल्य 3 करोड़ 43 लाख 64 हजार 472 रुपये आंका गया है।
ईडी ने बताया कि मामले में 4 जुलाई 2025 को पीएमएलए की धारा 17 के तहत गोवा और पुणे स्थित आठ परिसरों में तलाशी ली गई थी। तलाशी के दौरान डिजिटल उपकरण और विभिन्न दस्तावेज जब्त किए गए। मामले में आगे की जांच जारी है।
