HTML tutorial
HTML tutorial

उत्तराखण्ड की श्रमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का अध्ययन करने पहुंची उत्तर प्रदेश की टीम

उत्तराखण्ड की श्रमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का अध्ययन करने पहुंची उत्तर प्रदेश की टीम
Spread the love

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार की मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना अन्य राज्यों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के अपर श्रमायुक्त जुनैद अहमद के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने देहरादून पहुंचकर योजना की कार्यप्रणाली और क्रियान्वयन व्यवस्था का अध्ययन किया। टीम ने विशेष रूप से निर्माण श्रमिकों को उनके कार्यस्थल एवं आवास स्थल पर ही स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के उत्तराखण्ड मॉडल की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 23 जुलाई 2026 को श्रमिक कल्याण योजनाओं का शुभारंभ करते हुए दो मोबाइल चिकित्सा वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस पहल के तहत निर्माण श्रमिकों को उनके कार्यस्थल और आवास स्थल पर ही एक्स-रे, ईसीजी सहित 44 प्रकार की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श की सुविधा दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने योजना की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि स्वास्थ्य जांच में बीमारी से ग्रसित पाए जाने वाले श्रमिकों के समुचित उपचार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले पात्र श्रमिकों तक स्वास्थ्य सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया था।

उत्तर प्रदेश से आए अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में उत्तराखण्ड के श्रमायुक्त एवं उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के सचिव प्रकाश चन्द्र दुम्का ने योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और उनके पात्र आश्रितों को स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान, चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यकता पड़ने पर उच्च चिकित्सा संस्थानों में उपचार के लिए भेजने की व्यवस्था भी की गई है।

श्रमायुक्त ने बताया कि राज्य में उपलब्ध संसाधनों और व्यवस्थाओं का प्रभावी उपयोग करते हुए बिना अतिरिक्त पूंजीगत निवेश के अब तक लगभग 60 हजार पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को स्वास्थ्य जांच की सुविधा प्रदान की जा चुकी है। तकनीकी नवाचार, बेहतर प्रबंधन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के माध्यम से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश की टीम ने योजना की तकनीकी व्यवस्था, श्रमिकों के पंजीकरण एवं सत्यापन, स्वास्थ्य जांच शिविरों के संचालन, जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने, गंभीर बीमारियों की पहचान और उपचार के लिए संबंधित चिकित्सा संस्थानों में भेजने की प्रक्रिया का अध्ययन किया। इस दौरान उत्तर प्रदेश में भी इसी प्रकार की व्यवस्था विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का क्रियान्वयन मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना प्राप्त कर चुका है। उत्तर प्रदेश की टीम का यह अध्ययन भ्रमण दोनों राज्यों के बीच श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में अनुभवों के आदान-प्रदान और बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस अवसर पर उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के उप श्रमायुक्त विपिन कुमार तथा वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ दुर्गा चमोली भी उपस्थित रहीं।

देवभूमि खबर

Related articles