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डंकी रूट मामले में टिकट एजेंट तरुण खोसला गिरफ्तार, 30 अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में,छापेमारी में 4.62 करोड़ रुपये नकद और 19.14 करोड़ रुपये मूल्य की कीमती धातुएं बरामद

डंकी रूट मामले में टिकट एजेंट तरुण खोसला गिरफ्तार, 30 अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में,छापेमारी में 4.62 करोड़ रुपये नकद और 19.14 करोड़ रुपये मूल्य की कीमती धातुएं बरामद
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जालंधर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने अमेरिका में अवैध रूप से प्रवेश कराने वाले कथित डंकी रूट नेटवर्क के मामले में दिल्ली निवासी टिकट एजेंट तरुण खोसला को 23 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया है। धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किए गए खोसला को विशेष पीएमएलए अदालत ने 30 अक्टूबर 2026 तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है।

ईडी ने यह जांच पंजाब और हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज विभिन्न प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी। फरवरी 2025 में अमेरिका से 300 से अधिक भारतीय नागरिकों को निर्वासित किए जाने के बाद यह मामला जांच के दायरे में आया। इन लोगों पर मेक्सिको की सीमा के रास्ते अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करने का आरोप था।

जांच में सामने आया कि अमेरिका जाने के इच्छुक लोगों को एजेंट और बिचौलिए कानूनी माध्यमों से विदेश भेजने का झांसा देते थे, लेकिन कथित तौर पर उन्हें दक्षिण और मध्य अमेरिकी देशों के रास्ते अवैध एवं खतरनाक मार्गों से अमेरिका की सीमा तक पहुंचाया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया को डंकी रूट कहा जाता है। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति से लगभग 30 लाख से 60 लाख रुपये तक वसूले जाने की बात सामने आई है।

ईडी के अनुसार, तरुण खोसला इस नेटवर्क में अहम भूमिका निभा रहा था। पंजाब और हरियाणा के विभिन्न एजेंट विदेश जाने के इच्छुक लोगों के पासपोर्ट और धनराशि एकत्र कर दिल्ली में उसे सौंपते थे। इसके बाद खोसला दक्षिण अमेरिकी देशों गुयाना, सूरीनाम, इक्वाडोर और अल सल्वाडोर जैसे स्थानों के लिए वीजा और हवाई टिकट की व्यवस्था करता था। आरोप है कि वह आगे अवैध रूप से अमेरिका की सीमा पार कराने वाले स्थानीय एजेंटों और बिचौलियों के साथ समन्वय भी करता था। जांच के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति के लिए मार्ग और कीमत तय करने में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।

ईडी ने 9 और 11 जुलाई 2025 को इस मामले में 19 स्थानों पर तलाशी ली थी। इस दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, अभिलेख, डिजिटल उपकरण तथा निकारागुआ और इथियोपिया से संबंधित कथित फर्जी आव्रजन एवं वीजा मुहरें बरामद की गई थीं। इसके बाद 15 दिसंबर 2025 को एजेंटों द्वारा अवैध रूप से लोगों को अमेरिका भेजने से अर्जित आय से जुड़ी लगभग 5.41 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया था।

18 और 19 दिसंबर 2025 को पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में कई स्थानों पर की गई तलाशी के दौरान तरुण खोसला के परिसरों से 4.62 करोड़ रुपये नकद, लगभग 5.9 किलोग्राम वजन की सोने की छड़ें और सिक्के तथा लगभग 313 किलोग्राम चांदी की छड़ें बरामद की गई थीं। इन कीमती धातुओं और नकदी का कुल मूल्य लगभग 19.14 करोड़ रुपये बताया गया है। अन्य परिसरों से 50 से अधिक मूल पासपोर्ट, डायरियां, लेन-देन के रिकॉर्ड, संपत्ति संबंधी दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी बरामद किए गए थे।

जांच में जब्त मोबाइल फोन से प्राप्त संदेशों में कथित तौर पर आव्रजन संबंधी मंजूरी दिलाने, विदेशी हवाई अड्डों पर यात्रियों के समन्वय, टिकटों की व्यवस्था और अमेरिकी डॉलर में भुगतान से संबंधित बातचीत मिली है। ईडी के अनुसार, विदेशी संपर्कों के साथ बातचीत से यह संकेत मिला कि खोसला विदेशी एजेंटों के साथ मिलकर यात्रियों की आवाजाही और आव्रजन संबंधी व्यवस्थाओं का समन्वय करता था। जांच एजेंसी ने फर्जी पीत ज्वर टीकाकरण प्रमाणपत्रों की व्यवस्था करने और अवैध मार्ग से लोगों को अमेरिका भेजने के लिए टिकट तथा अन्य इंतजाम करने में उसकी कथित भूमिका का भी उल्लेख किया है।

ईडी की जांच में खोसला की एकल स्वामित्व वाली फर्म मेसर्स बीजे इंटरनेशनल के बैंक खाते में वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच 414 नकद-जमा लेन-देन के माध्यम से 30.38 करोड़ रुपये जमा होने का भी पता चला है। एजेंसी इन लेन-देन और कथित अवैध आव्रजन नेटवर्क से जुड़े धन के स्रोत की जांच कर रही है।

ईडी के अनुसार, यह नेटवर्क कई वर्षों से संगठित तरीके से काम कर रहा था। इसमें लोगों को विदेश भेजने का झांसा देकर उनसे बड़ी रकम वसूली जाती थी और एजेंटों, बिचौलियों तथा विदेशी संपर्कों के माध्यम से यात्रा की पूरी व्यवस्था की जाती थी। मामले में धन के लेन-देन, संपत्तियों और अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर आगे की जांच जारी है।

देवभूमि खबर

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