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अनुपूरक बजट में रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और ठेकेदारों के बकाया भुगतान पर सरकार स्पष्ट कार्ययोजना पेश करे — राकेश राणा

अनुपूरक बजट में रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और ठेकेदारों के बकाया भुगतान पर सरकार स्पष्ट कार्ययोजना पेश करे — राकेश राणा
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गैरसैंण। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव राकेश राणा ने राज्य सरकार द्वारा गैरसैंण में ₹7,844 करोड़ का अनुपूरक बजट प्रस्तुत किए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि केवल बजट का आकार बढ़ाने और बड़े-बड़े वित्तीय प्रावधानों की घोषणा करने से प्रदेश की जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। सरकार को बताना चाहिए कि इस बजट से आम जनता, बेरोजगार युवाओं, किसानों, कर्मचारियों, छोटे व्यापारियों और पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को वास्तविक लाभ कब और कैसे मिलेगा।

राणा ने कहा कि उत्तराखंड की जनता आज भी बेरोजगारी, महँगाई, पलायन, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षकों एवं विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता केवल बजट के आंकड़े बढ़ाना नहीं, बल्कि जनता की मूलभूत समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना होना चाहिए।

जल जीवन मिशन के ठेकेदारों के बकाया भुगतान पर सवाल उठाते हुए राकेश राणा ने कहा कि ठेकेदारों के लगभग ₹2,000 करोड़ से अधिक के भुगतान लंबित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में केवल ₹300 करोड़ का प्रावधान करने से समस्या का कितना समाधान होगा? सरकार को ठेकेदारों का वास्तविक कुल बकाया, भुगतान की गई राशि और शेष देनदारी का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। ठेकेदारों को समय पर भुगतान न मिलने से निर्माण कार्यों और ग्रामीण पेयजल योजनाओं पर पड़ने वाले प्रभाव की भी समीक्षा होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं और बड़ी संख्या में पलायन करने को मजबूर हैं। सरकार स्पष्ट करे कि इस अनुपूरक बजट से कितने नए रोजगार सृजित होंगे और कितने रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। केवल घोषणाओं से युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता।

स्वास्थ्य एवं शिक्षा के सवाल पर राणा ने कहा कि डिजिटल लर्निंग के लिए ₹200 करोड़ का प्रावधान करने के साथ-साथ पहाड़ों में शिक्षकों की कमी, अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के रिक्त पदों और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव को दूर करना भी आवश्यक है। टिहरी गढ़वाल सहित पर्वतीय जिलों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और टिहरी मेडिकल कॉलेज की मांग पर सरकार को स्पष्ट, लिखित और समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि धान और गेहूँ की खरीद के लिए ₹1,100 करोड़ का प्रावधान किया गया है। सरकार बताए कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य, समय पर भुगतान और पर्याप्त खरीद केंद्र उपलब्ध कराने की क्या व्यवस्था है। पर्वतीय किसानों, बागवानों और छोटे उत्पादकों की आय बढ़ाने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

स्थानीय निकायों के संबंध में राणा ने कहा कि राज्य कर राजस्व में उनकी हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव तभी सार्थक होगा, जब नगर निकायों को समय पर धनराशि, पर्याप्त कर्मचारी और विकास कार्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक अधिकार मिलेंगे। केवल वित्तीय प्रावधान से शहरों और कस्बों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सबसे बड़ी चुनौतियों में पलायन रोकना, गाँवों को आबाद रखना, स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करना और पर्वतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना शामिल है। सरकार को बताना चाहिए कि इन उद्देश्यों के लिए कितनी धनराशि खर्च की जाएगी और निर्धारित लक्ष्यों को कब तक पूरा किया जाएगा।

राणा ने कहा कि गैरसैंण विधानसभा सत्र में प्रदेश की जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए। बेरोजगारी, महँगाई, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, भ्रष्टाचार के आरोपों और ठेकेदारों के लंबित भुगतान पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। विधानसभा में जनहित के मुद्दों को पर्याप्त समय मिलना चाहिए तथा बजट के प्रत्येक प्रमुख प्रावधान पर जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

राकेश राणा ने कहा कि भाजपा सरकार को समझना चाहिए कि बजट का वास्तविक मूल्य उसके आकार से नहीं, बल्कि जनता के जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलाव से तय होता है। सरकार को अनुपूरक बजट के प्रत्येक प्रमुख प्रावधान का विभागवार विवरण सार्वजनिक करना चाहिए, खर्च की नियमित समीक्षा करनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि कौन-सा कार्य कब तक पूरा होगा।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता को केवल घोषणाएँ नहीं, बल्कि रोजगार, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, किसानों को राहत, गाँवों में बुनियादी सुविधाएँ और ठेकेदारों को उनके कार्यों का समय पर भुगतान चाहिए।

हमारा विरोध विकास का नहीं, बल्कि जनता की वास्तविक जरूरतों की अनदेखी और बिना जवाबदेही वाली घोषणाओं का है। सरकार को आंकड़ों से आगे बढ़कर धरातल पर काम करके दिखाना चाहिए।

देवभूमि खबर

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