ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 23.35 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच

बेंगलुरु। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय ने के.सी. वीरेंद्र और अन्य से जुड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी एवं धनशोधन मामले में 23.35 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 23 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के माध्यम से की गई। अटैच की गई संपत्तियों में 13 करोड़ 76 लाख 96 हजार 706 रुपये की चल संपत्तियां और 9 करोड़ 58 लाख 50 हजार रुपये की अचल संपत्तियां शामिल हैं। कुल संपत्तियों का मूल्य 23 करोड़ 35 लाख 46 हजार 706 रुपये है।
ईडी की जांच कई प्राथमिकी के आधार पर शुरू हुई थी। इनमें ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुआ मंचों के माध्यम से धोखाधड़ी, दूसरे व्यक्ति का रूप धारण कर ठगी, आपराधिक साजिश और जबरन वसूली के आरोप लगाए गए थे। जांच में सामने आया कि के.सी. वीरेंद्र और उसके सहयोगियों पर किंग567 सहित विभिन्न अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी मंचों का संचालन करने का आरोप है। इन गतिविधियों में भुगतान गेटवे, मुखौटा कंपनियों और दूसरे व्यक्तियों के नाम पर संचालित बैंक खातों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
ईडी के अनुसार, सट्टेबाजी मंचों पर लोगों को धन जमा करने के लिए प्रेरित किया जाता था और कथित तौर पर सट्टेबाजी की प्रक्रिया में हेरफेर तथा निकासी पर रोक लगाकर उन्हें ठगा जाता था। जांच में 2,300 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय का पता चला है। आरोप है कि इस धन को कई बैंक खातों, हवाला माध्यमों और विदेशी संस्थाओं के जरिए स्थानांतरित कर छिपाया गया तथा इसका इस्तेमाल महंगी संपत्तियां खरीदने, कारोबारी निवेश, विदेशों में धन भेजने और निजी खर्चों के लिए किया गया।
जांच के दौरान फोनेपैसा पेमेंट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड की भूमिका भी सामने आई। कंपनी का लाभकारी स्वामित्व गुलशन खट्टर के पास बताया गया है। ईडी के मुताबिक, अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में भुगतान गेटवे और वित्तीय मध्यस्थ के रूप में सेवाएं देने के बदले कंपनी को भारी कमीशन मिला था। इस मामले में पहले 29 जनवरी 2026 को लगभग 33 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई थीं।
ईडी की जांच में सिमटेक से जुड़ी कंपनी के बैंक खातों में किंग567 से संबंधित संदिग्ध खातों से धनराशि आने का भी पता चला। सिमटेक आईटी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक नेहा टंडन की कंपनी के प्रबंधन में सक्रिय भूमिका नहीं होने और कंपनी का संचालन उनके पति गुलशन खट्टर द्वारा किए जाने की बात जांच में सामने आई। ईडी के अनुसार, कंपनी में संदिग्ध धनराशि प्राप्त होने और खट्टर की कथित भूमिका के आधार पर नेहा टंडन के स्वामित्व या उनके नाम पर मौजूद संपत्तियों को अपराध से अर्जित आय से जुड़ा माना गया है।
इससे पहले ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा 17 के तहत कई राज्यों में 60 से अधिक ठिकानों पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की थी। इस दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, सोने की ईंटें, सोने-चांदी के आभूषण, संदिग्ध बैंक खातों में जमा धनराशि, वाहन, डिजिटल उपकरण और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त या फ्रीज किए गए थे। ईडी ने के.सी. वीरेंद्र को अधिनियम की धारा 19 के तहत गिरफ्तार भी किया था।
ईडी ने इस मामले में 18 अक्टूबर 2025 को अभियोजन शिकायत और 20 फरवरी 2026 को पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। विशेष पीएमएलए अदालत ने 4 मई 2026 को इन पर संज्ञान लिया। इससे पहले लगभग 177.30 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की गई थीं, जिन्हें पीएमएलए के निर्णायक प्राधिकारी ने पुष्टि प्रदान की थी।
ईडी के अनुसार, मौजूदा कार्रवाई को मिलाकर इस मामले में अब तक अटैच, जब्त या फ्रीज की गई संपत्तियों का कुल मूल्य 343 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। एजेंसी ने कहा कि अपराध से अर्जित आय के मूल्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ताजा कार्रवाई की गई है। मामले में आगे की जांच जारी है।


