आपदा से उठी उम्मीद की रोशनी: सहस्त्रधारा की महिलाओं के हाथों बनी मोमबत्तियों से जगमगाएगी देहरादून की दिवाली
देहरादून।दीपावली यानी रोशनी का त्योहार, जो हर वर्ष लोगों के जीवन में उजाला लेकर आता है। इस बार राजधानी देहरादून के सहस्त्रधारा के आपदाग्रस्त क्षेत्र में इस उजाले को एक विशेष अर्थ मिला है। बीते महीने आई आपदा ने जहां लोगों को गहरे जख्म दिए, वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जनकल्याणकारी योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता को नई दिशा दी है।
देहरादून जनपद के रायपुर ब्लॉक अंतर्गत न्याय पंचायत सरोना की ग्राम पंचायत धनौला की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने “वोकल फॉर लोकल” अभियान को आगे बढ़ाते हुए आकर्षक और सजावटी मोमबत्तियाँ तैयार की हैं, जो इस दीपावली पर देहरादून के घर-घर को रोशन करेंगी।
सहस्त्रधारा के आपदा प्रभावित गांवों में जहाँ कभी अंधेरा और निराशा का माहौल था, वहीं अब ग्रामीण महिलाएँ आशा और उजाले का प्रतीक बन चुकी हैं। दुर्गा और लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की इन महिलाओं ने न केवल स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दिया है, बल्कि विदेशी सामानों, विशेषकर चीन निर्मित वस्तुओं के बहिष्कार का भी उदाहरण प्रस्तुत किया है। समूह की इन महिलाओं द्वारा तैयार मोमबत्तियाँ बाजार में उचित मूल्य पर बेची जा रही हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत दोनों समूहों की 10 महिलाओं ने पहले मोमबत्ती निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद एनआरएलएम की मदद से दीपावली से पहले उन्होंने दीपक और मोमबत्तियाँ तैयार कीं। दुर्गा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष कौशल्या नेगी ने बताया कि अब तक वे एक हजार पैकेट तैयार कर चुकी हैं, जिनकी शहर में होम डिलीवरी और दुकानों पर बिक्री दोनों चल रही हैं। प्रत्येक पैकेट में 6 से 8 मोमबत्तियाँ हैं, जिनकी कीमत ₹15 से ₹35 प्रति पीस है, जबकि लागत ₹10 से ₹20 तक आती है।
एनआरएलएम की ओर से समूह को सालाना 7% ब्याज पर ₹1.5 लाख की कैश क्रेडिट लिमिट (CCL), 1% ब्याज पर ₹75,000 का कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड और ₹10,000 का रिवॉल्विंग फंड प्रदान किया गया। महिलाओं को प्रशिक्षण के दौरान स्वरोजगार, उद्यमिता विकास, समय प्रबंधन, बाजार संचालन, ग्राहक प्रबंधन और डिजिटल बैंकिंग की जानकारी भी दी गई।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के “वोकल फॉर लोकल” अभियान ने इन महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता की नई रोशनी जगाई है। दोनों समूहों की महिलाएँ अब तक ₹1.5 लाख से अधिक की आमदनी कर “लखपति दीदी” बनने की दिशा में अग्रसर हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री की योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त किया है।
मुख्य विकास अधिकारी देहरादून अभिनव शाह ने बताया कि जिले की स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ दीपावली पर्व के लिए सजावटी सामग्री तैयार कर रही हैं। रायपुर ब्लॉक की दुर्गा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा बनाए गए मिट्टी के दीपक और डिजाइनदार मोमबत्तियाँ शहर के विभिन्न बाजारों और स्टालों पर खूब बिक रही हैं। उन्होंने कहा कि “ये महिलाएँ न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के सपने को साकार कर रही हैं।”
