भारी बरसात में जनहानि रोकना सभी की जिम्मेदारी :अखिलेश व्यास
देहरादून।उत्तराखंड प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम है। लेकिन हर वर्ष मानसून के दौरान यहां भारी बरसात और प्राकृतिक आपदाओं से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। इस वर्ष भी लगातार बारिश के कारण भूस्खलन, सड़क दुर्घटनाओं और नदियों में जलस्तर बढ़ने जैसी घटनाओं से अनेक लोगों ने अपनी जान गंवाई है। दुखद यह है कि लगातार चेतावनियों और घटनाओं के बावजूद यात्रियों और स्थानीय लोगों का आवागमन थम नहीं रहा है।
यात्रा और आवाजाही की यह अनिवार्यता कई बार लापरवाही का रूप ले लेती है, जिससे बड़ी जनहानि सामने आती है। ऐसी स्थिति में केवल सरकार ही जिम्मेदार नहीं ठहराई जा सकती, बल्कि आम नागरिकों की भी बराबर की नैतिक जिम्मेदारी बनती है। जहां एक ओर सरकार को आपदा प्रबंधन को और अधिक सशक्त करना होगा, वहीं लोगों को भी मौसम की चेतावनियों का पालन करना चाहिए। अनावश्यक यात्रा से बचना, स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करना और सतर्क रहना हर व्यक्ति का कर्तव्य है।
आज जरूरत इस बात की है कि सरकार और समाज मिलकर आपदा प्रबंधन की सामूहिक सोच विकसित करें। तकनीक, जागरूकता और अनुशासन ही वह साधन हैं, जिनके सहारे जनहानि को रोका जा सकता है। आखिरकार, जीवन से बड़ा कोई दूसरा मूल्य नहीं होता।
