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28 वर्षों से पदोन्नति और वित्तीय लाभ नहीं मिलने का आरोप, मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार

28 वर्षों से पदोन्नति और वित्तीय लाभ नहीं मिलने का आरोप, मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार
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जिला कार्यक्रम अधिकारी सरोज कुमार त्रिपाठी की पत्नी अंजू त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री को भेजा प्रार्थना पत्र, वेतनवृद्धि बहाली और पदोन्नति की मांग

देहरादून। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग में जिला कार्यक्रम अधिकारी के पद पर कार्यरत सरोज कुमार त्रिपाठी के मामले में उनकी पत्नी अंजू त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को प्रार्थना पत्र भेजकर विभागीय अन्याय और उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उन्होंने पति को 28 वर्षों की सेवा के बावजूद पदोन्नति, समयमान वेतनमान और सुनिश्चित कैरियर प्रोन्नयन (एसीपी) का पूरा लाभ नहीं मिलने का दावा करते हुए मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है।

मुख्यमंत्री को दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, सरोज कुमार त्रिपाठी का चयन वर्ष 1998 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, इलाहाबाद के माध्यम से हुआ था। उन्होंने 21 मई 1999 को जिला कार्यक्रम अधिकारी के पद पर कार्यभार ग्रहण किया। प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2001 में आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए स्वच्छता सामग्री की खरीद में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने पर उन्होंने एक वरिष्ठ लिपिक के विरुद्ध गोपनीय जांच कर कार्रवाई की संस्तुति की थी। इसके बाद 10 जुलाई 2002 को उन्हें भी निलंबित कर दिया गया।

अंजू त्रिपाठी के अनुसार, उनके पति लगभग पांच वर्ष चार माह तक निलंबित रहे और 12 नवंबर 2007 को शासनादेश के माध्यम से सवेतन बहाल किए गए। हालांकि, बहाली के साथ एक वार्षिक वेतनवृद्धि संचयी प्रभाव से रोकने और कथित गबन की धनराशि का 75 प्रतिशत राजकोष में जमा करने का आदेश दिया गया था। प्रार्थना पत्र में दावा किया गया है कि उनके पति ने दो अप्रैल 2008 को निर्धारित धनराशि राजकोष में जमा कर दी, लेकिन इसके बावजूद उनकी वेतनवृद्धि बहाल नहीं की गई। वहीं, मामले में संबंधित दूसरे कर्मचारी से शेष 25 प्रतिशत धनराशि की वसूली नहीं होने और उसे वित्तीय लाभ तथा पदोन्नति मिलने पर भी सवाल उठाए गए हैं।

प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि विभाग में 28 वर्षों की सेवा के बावजूद सरोज कुमार त्रिपाठी को समयमान वेतनमान, एसीपी और नियमित पदोन्नति का पूरा लाभ नहीं मिला। अंजू त्रिपाठी ने कहा है कि निदेशक स्तर से सेवा विवरण, वार्षिक गोपनीय प्रविष्टियों और आवश्यक प्रमाण पत्रों सहित अभिलेख शासन को उपलब्ध कराए जाने के बावजूद उनके पति की एसीपी संबंधी पात्रता का निर्धारण देरी से किया गया।

उन्होंने 11 मई 2026 को जारी कार्यालय ज्ञाप का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पति को वर्ष 2009 में देय प्रथम एसीपी का लाभ 21 मई 2017 से अनुमन्य किया गया, जबकि उनके ही बैच के एक कनिष्ठ अधिकारी को उसी दिन जारी अलग कार्यालय ज्ञाप के माध्यम से प्रथम और द्वितीय एसीपी का लाभ उनकी देय तिथियों से स्वीकृत किया गया। उन्होंने इस अंतर के आधार और संबंधित कार्यालय ज्ञाप में उल्लिखित शासनादेशों तथा प्रावधानों की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। ये आरोप और आपत्तियां प्रार्थना पत्र में प्रस्तुत किए गए पक्ष पर आधारित हैं।

अंजू त्रिपाठी ने वर्ष 2019 में मिली एक गुमनाम शिकायत को भी पति की पदोन्नति में बाधा बनाए रखने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि संबंधित शासनादेश के अनुसार ऐसी शिकायत को पोषणीय नहीं होने के आधार पर निस्तारित किया जाना चाहिए था।

मुख्यमंत्री से की गई प्रमुख मांगों में संचयी प्रभाव से रोकी गई वार्षिक वेतनवृद्धि को एरियर सहित बहाल करना, मई 2009 से प्रथम एसीपी, मई 2015 से द्वितीय एसीपी और मई 2025 से तृतीय एसीपी का लाभ नियमानुसार दिलाना शामिल है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आठ वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर देय प्रोन्नत वैयक्तिक वेतनमान का लाभ देने तथा विभाग में रिक्त पदों के सापेक्ष उनके पति को उपनिदेशक और संयुक्त निदेशक स्तर पर पदोन्नति देने की मांग भी की है।

प्रार्थना पत्र के साथ 24 संलग्नक प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख है। अब इस मामले में शासन और विभाग की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर संबंधित अधिकारी और परिवार की निगाहें टिकी हैं।

देवभूमि खबर

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