बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी की कार्रवाई, पारेख एल्युमिनेक्स लिमिटेड से जुड़ी 53.95 करोड़ की संपत्तियां कुर्क

मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोन-1 कार्यालय ने बैंक धोखाधड़ी एवं धन शोधन के मामले में पारेख एल्युमिनेक्स लिमिटेड (पीएएल) और अन्य से जुड़ी 53.95 करोड़ रुपये की चल एवं अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है।
ईडी ने यह जांच मुंबई स्थित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी। प्राथमिकी में पारेख एल्युमिनेक्स लिमिटेड एवं अन्य के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(डी) और 13(2) के तहत मामले दर्ज किए गए थे।
ईडी की जांच में सामने आया कि पारेख एल्युमिनेक्स लिमिटेड ने बैंकों के एक समूह से ऋण प्राप्त करने के लिए स्टॉक और देनदारों से संबंधित विवरणों में कथित तौर पर बढ़ा-चढ़ाकर आंकड़े प्रस्तुत किए थे। इसके आधार पर कंपनी ने ऋण प्राप्त किए। बाद में कंपनी के ऋण खाते लगभग 2,296 करोड़ रुपये की बकाया राशि के साथ गैर निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि जेके शाह समूह ने विभिन्न कंपनियों और व्यक्तियों के माध्यम से अपराध से अर्जित लगभग 110.54 करोड़ रुपये की राशि को अन्यत्र हस्तांतरित करने में सहायता की। इसके अलावा समूह इस धनराशि का लाभार्थी भी रहा और उसे लगभग 70.25 करोड़ रुपये प्राप्त हुए तथा उनका उपयोग किया गया। यह राशि कुल 2,296.58 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय का हिस्सा बताई गई है।
इस कथित बैंक धोखाधड़ी से इंडियन ओवरसीज बैंक के नेतृत्व वाले 16 अन्य बैंकों सहित कुल बैंक समूह को आर्थिक नुकसान हुआ।
ईडी इस मामले में इससे पहले लगभग 493 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क कर चुकी है। इसके अतिरिक्त धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय, मुंबई में अभियोजन शिकायत भी दाखिल की जा चुकी है, जिस पर न्यायालय ने संज्ञान लिया है।
ताजा कार्रवाई के बाद इस मामले में ईडी द्वारा अब तक कुर्क की गई कुल संपत्तियों का मूल्य लगभग 546 करोड़ रुपये हो गया है।


