सवर्ण समाज का समानता सम्मेलन संपन्न, जातीय आधार पर बनने वाले कानूनों में बदलाव की उठी मांग

सवर्ण समाज का समानता सम्मेलन संपन्न, जातीय आधार पर बनने वाले कानूनों में बदलाव की उठी मांग
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देहरादून। उत्तराखण्ड समानता पार्टी एवं अखिल भारतीय समानता मंच की ओर से रविवार को देहरादून में सवर्ण समाज का समानता सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में जातीय आधार पर बने कानूनों, आरक्षण व्यवस्था तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रावधानों को लेकर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने सामाजिक समरसता और समानता के लिए संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा एवं आवश्यक संशोधन की मांग उठाई।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि स्वामी आनन्द स्वरूप जी महाराज ने जातीय आधार पर बने कानूनों की आलोचना करते हुए कहा कि उनके अनुसार ऐसे प्रावधान सामाजिक सौहार्द के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति उत्पीड़न निवारण अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता बताते हुए कहा कि यदि इन कानूनों में बदलाव नहीं किया गया तो देश में गंभीर सामाजिक टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

उत्तराखण्ड समानता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सी.एस. नेगी की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में प्रदेश के बाहर से आए बुद्धिजीवियों एवं समानता के पक्षधर प्रतिनिधियों ने भी विचार रखे। ‘सच संविधान का’ पुस्तक के लेखक एवं एसएसपी के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता पंकज त्रिपाठी ने सामान्य वर्ग से जुड़े कानूनों एवं संविधान में किए गए संशोधनों का उल्लेख करते हुए राजनीतिक विकल्प को मजबूत किए जाने की आवश्यकता बताई।

पूर्व डीआईजी जुगल किशोर तिवारी ने जातीय कानूनों के माध्यम से सामान्य वर्ग के उत्पीड़न की धारणा का विरोध करते हुए संबंधित कानूनों की समीक्षा और आवश्यक संशोधन की बात कही। सम्मेलन में जातिगत आरक्षण, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न निवारण) अधिनियम, 1989, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए प्रावधानों तथा सशक्त सवर्ण आयोग के गठन की मांग सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।

अखिल भारतीय समानता मंच के राष्ट्रीय महासचिव वी.पी. नौटियाल ने पदोन्नति में आरक्षण समाप्त किए जाने को लेकर विभिन्न न्यायालयों में दायर अपीलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सामाजिक मुद्दों के समाधान के लिए न्यायालय की शरण और आंदोलन के साथ राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी आवश्यक है। उन्होंने उत्तराखण्ड समानता पार्टी को मंच के मुद्दों के साथ खड़े होने वाली पार्टी बताते हुए संगठन को मजबूत करने की बात कही।

सम्मेलन में हिमाचल से देवभूमि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रूमित ठाकुर, क्षत्रिय चेतना मंच उत्तराखण्ड के राष्ट्रीय महासचिव अधिवक्ता रवि नेगी, महानगर शाखा अध्यक्ष ठाकुर रणजीत सिंह कैन्तुरा, अखिल भारतीय समानता मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डी.एन. शाहू, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष सुरेन्द्र पाण्डे, डॉ. जी.सी. पाण्डे तथा अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष त्रिभुवन शर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने विचार रखे।

सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों एवं पार्टी पदाधिकारियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। अध्यक्षीय संबोधन में सी.एस. नेगी ने आरक्षण की समीक्षा के साथ जातीय भेदभाव से जुड़े कानूनों पर चर्चा और आवश्यक संशोधन की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पार्टी उत्तराखण्ड के सभी जनपदों में सम्मेलन एवं जनजागरण कार्यक्रमों के माध्यम से इन मुद्दों को जनता के बीच ले जाएगी।

कार्यक्रम का संचालन वी.पी. नौटियाल, वी.के. धस्माना एवं टी.एस. नेगी ने संयुक्त रूप से किया। अखिल भारतीय समानता मंच के प्रांतीय महासचिव जे.पी. कुकरेती ने मंच के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। सम्मेलन में समानता पार्टी के प्रमुख महासचिव एल.पी. रतूड़ी, संगठन महासचिव श्रीधर प्रसाद नैथानी सहित बड़ी संख्या में लोगों ने प्रतिभाग किया।

सम्मेलन में बी.एस. भण्डारी, प्रो. भगवती प्रसाद पुरोहित, पवन डोभाल, राजेन्द्र प्रसाद जोशी, आशुतोष नेगी, विशाल शर्मा, रीता कौल, ऊषा डोभाल, पी.सी. तिवारी, वैभव जोशी, डॉ. भरत सिंह बिष्ट, ऊमा शंकर थपलियाल, ऊमा शंकर कुकरेती, गुलाब सिंह बेडवाल, राजेन्द्र सिंह पंवार और नरेन्द्र कुमार मुण्डेपी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

देवभूमि खबर

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