प्रवासी बुद्धिजीवियों से संवाद में मुख्यमंत्री धामी ने साझा की उत्तराखण्ड के विकास की प्राथमिकताएं

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को नई दिल्ली स्थित उत्तराखण्ड निवास में विभिन्न संस्थानों से जुड़े उत्तराखण्ड के प्रवासी बुद्धिजीवियों से संवाद किया। इस दौरान प्रबुद्धजनों ने राज्य के विकास को लेकर अपने सुझाव साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी उत्तराखण्डवासियों और प्रबुद्धजनों की विशेषज्ञता एवं अनुभव राज्य की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि संवाद के दौरान प्राप्त सुझावों को राज्य के विकास के लिए तैयार की जाने वाली नीतियों में शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अपनी व्यस्तताओं के बावजूद कार्यक्रम में उपस्थित होने के लिए सभी प्रवासी बंधुओं का आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण राज्य है। सरकार ने विकास को गति देने के लिए राज्य का बजट बढ़ाकर एक लाख 12 हजार करोड़ रुपये किया है। उन्होंने कहा कि रिवर्स पलायन की दिशा में अभी और कार्य करने की आवश्यकता है। ‘पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी’ को राज्य के विकास में उपयोगी बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। पर्यटन, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से रिवर्स माइग्रेशन की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने राज्य में रिवर्स माइग्रेशन में 44 प्रतिशत वृद्धि होने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने राज्य की मजबूत कनेक्टिविटी को निवेश की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे के शुरू होने से राष्ट्रीय राजधानी और देहरादून के बीच यात्रा का समय कम हुआ है। देहरादून से देश के प्रमुख शहरों के लिए 50 से अधिक हवाई सेवाएं उपलब्ध हैं। हरिद्वार प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है, जबकि ऊधमसिंह नगर का पंतनगर कृषि के साथ औद्योगिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। उन्होंने पंतनगर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे को औद्योगिक और रसद विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
राज्य की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग की सतत विकास लक्ष्य रैंकिंग में उत्तराखण्ड ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। पर्वतीय और पूर्वोत्तर राज्यों की श्रेणी में भी निवेश के लिए बेहतर नीतिगत वातावरण तैयार करने की दिशा में राज्य को अग्रणी स्थान प्राप्त हुआ है।
युवाओं और रोजगार के विषय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि 4 जुलाई 2021 को मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का संकल्प लिया गया। पेपर लीक और नकल के मामलों में कठोर कार्रवाई की गई तथा नकल माफिया के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 100 से अधिक लोगों को जेल भेजा गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी गई है और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि होमस्टे, छोटे होटल, कृषि, बागवानी और स्थानीय उद्यमों के माध्यम से बड़ी संख्या में युवा और महिलाएं स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और आदि कैलाश जैसी यात्राओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं। चारधाम यात्रा में वृद्धि के साथ कांवड़ यात्रा में करीब पांच करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आदि कैलाश क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के बाद पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में भी वृद्धि हुई है। इससे सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिला है।
मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड में इसे लागू कर राज्य ने सुशासन और समान अधिकारों की दिशा में एक मॉडल प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के अधिकारों को मजबूती मिली है।
उन्होंने राज्य में लागू धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानूनों का भी उल्लेख किया और कहा कि उत्तराखण्ड की अस्मिता, शांति और संस्कृति की रक्षा के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है।
शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री के अनुसार, निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहे 250 से अधिक मदरसों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड में शिक्षा संस्थानों को मजबूत करना और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों तक सड़क, रेल, रोपवे और हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है। चारधाम यात्रा और धार्मिक पर्यटन को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा गया है तथा युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के युवा खेलों के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के बाद उत्तराखण्ड की पहचान खेलभूमि के रूप में भी मजबूत हुई है। राज्य सरकार खेल सुविधाओं के विकास और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नकल विरोधी कानून का उद्देश्य मेहनती युवाओं के भविष्य की रक्षा करना है। किसी भी युवा की वर्षों की मेहनत, उसके सपनों और उसके अधिकार के साथ अन्याय न हो, यही सरकार का संकल्प है।
कार्यक्रम में प्रसून जोशी, प्रो. प्रदीप जोशी, अश्विनी लोहानी, प्रो. हर्ष वी. पंत, सुभाष धुलिया, प्रो. धनंजय जोशी, सुष्मिता रावत, डॉ. सरिता पाठक, कुलानंद जोशी, निर्मल पाठक, हरिसुमन बिष्ट, देव रतूड़ी, डॉ. सुषमा रावत, डॉ. निधि गुसाईं, देवेंद्र गुसाईं, डॉ. के.के. पाण्डेय, विनोद बछेती, डी.एस. रावत, डॉ. सरोज पाण्डेय, शंकर पाण्डेय, प्रो. दिनेश सकलानी, प्रो. पवन कुमार जोशी, वीरेंद्र सिंह नेगी, पवन कुमार मैठानी, हरेंद्र असवाल, संजय जोशी, डॉ. भुवन चंद्र पाण्डेय, विजय जोशी, डॉ. मेघा बिष्ट, लक्ष्मी रावत सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. गोविंद सिंह ने किया।
