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प्राकृतिक चुनौती के बीच जान जोखिम में डालकर फायर कर्मियों ने निभाया फर्ज ,कल्पगंगा किनारे से घोड़े का साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन सफल

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चमोली।प्राकृतिक आपदाएं जहां आम जनजीवन को चुनौती देती हैं, वहीं कुछ ऐसे जांबाज़ होते हैं जो अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण उत्तराखंड के ज्योर्तिमठ क्षेत्र में सामने आया, जहां कल्पगंगा नदी के उफनते बहाव के बीच फंसे एक घोड़े को फायर सर्विस की टीम ने असंभव से दिखने वाले हालातों में साहस और सूझबूझ के साथ सुरक्षित बाहर निकाला।

30 जुलाई 2025 की सुबह करीब 09:25 बजे तहसीलदार ज्योर्तिमठ द्वारा फायर स्टेशन को मोबाइल फोन के माध्यम से सूचना दी गई कि ज्योर्तिमठ-उर्गम मार्ग पर स्थित सणला गांव के पास कल्पगंगा नदी की दूसरी ओर एक घोड़ा तेज बहाव के बीच फंसा हुआ है। सूचना मिलते ही ज्योर्तिमठ फायर स्टेशन से रेस्क्यू टीम आवश्यक उपकरणों सहित तत्काल मौके के लिए रवाना हुई।

मौके पर पहुंचने पर टीम ने पाया कि नदी का बहाव अत्यंत तेज था और पारंपरिक रास्तों से नदी पार करना असंभव था। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए रेस्क्यू टीम ने जोखिम उठाते हुए करीब 400 मीटर ऊंची चट्टान से उतरकर नदी के दूसरे किनारे पहुंचने का निर्णय लिया। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में भी टीम के जांबाज़ कर्मियों ने न केवल अपने साहस का परिचय दिया, बल्कि संकट में फंसे जानवर के प्रति मानवीय कर्तव्य निभाते हुए घोड़े को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की।

इस जोखिमपूर्ण और प्रेरणादायी अभियान को सफल बनाने वाले फायर कर्मियों के नाम हैं – LFM राजीव सिंह, FM पंकज थपलियाल, FM हरदीप, FM सौरभ पुरोहित, FM प्रियंका रावत और FM प्रियंका। इन सभी ने अद्भुत समर्पण, टीमवर्क और प्रशिक्षण का परिचय देते हुए अपनी ड्यूटी को बखूबी निभाया।

देवभूमि खबर

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