भारत में नियमों का पालन न करने वाले 15 क्रिप्टो सेवा प्रदाताओं पर FIU-IND की कार्रवाई, नोटिस जारी

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नई दिल्ली। भारत की वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू-आईएनडी) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत नियमों का पालन न करने वाले 15 वर्चुअल डिजिटल एसेट्स सर्विस प्रोवाइडर्स (वीडीए एसपी) के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी किए हैं।

एफआईयू-आईएनडी के निदेशक ने पीएमएलए की धारा 13 के तहत इन संस्थाओं को अनुपालन न करने के लिए नोटिस जारी किए हैं। इसके साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(बी) और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया नैतिकता संहिता) संशोधन नियम, 2025 के प्रावधानों के तहत संबंधित एप्लिकेशन और यूआरएल को सार्वजनिक पहुंच से हटाने के लिए भी नोटिस जारी किए गए हैं।

कार्रवाई की जद में आने वाले प्रमुख वर्चुअल डिजिटल एसेट्स सेवा प्रदाताओं में वीक्स, ब्लोफिन, रेज़ोरेक्स, बिटुनिक्स, डिजीफाइनक्स, टूबिट, एक्सटीडॉटकॉम, लाटोकेन, वू एक्स, पायोनेक्स, चेंजनाउ, सिंपलस्वैप, फिक्स्डफ्लोट, व्हाइटबिट और गार्डेरियन शामिल हैं।

एफआईयू-आईएनडी के अनुसार, ये संस्थाएं भारत में पीएमएलए के प्रासंगिक प्रावधानों का अनुपालन किए बिना संचालित पाई गईं। इसलिए उनके खिलाफ नियमानुसार अनुपालन कार्रवाई शुरू की गई है।

गौरतलब है कि मार्च 2023 में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स सर्विस प्रोवाइडर्स को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत एंटी मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण विरोधी (एएमएल/सीएफटी) ढांचे के दायरे में लाया गया था।

भारत में कार्यरत ऑनशोर और ऑफशोर दोनों प्रकार के वर्चुअल डिजिटल एसेट्स सेवा प्रदाताओं को, यदि वे वर्चुअल डिजिटल एसेट्स और फिएट मुद्रा के बीच विनिमय, डिजिटल एसेट्स के हस्तांतरण, सुरक्षा, प्रबंधन अथवा नियंत्रण से संबंधित गतिविधियों में शामिल हैं, तो उन्हें एफआईयू-आईएनडी के साथ रिपोर्टिंग इकाई के रूप में पंजीकरण कराना अनिवार्य है।

एफआईयू-आईएनडी ने स्पष्ट किया है कि ये दायित्व गतिविधि आधारित हैं और भारत में किसी संस्था की भौतिक उपस्थिति पर निर्भर नहीं हैं। संबंधित संस्थाओं को पीएमएलए के तहत रिपोर्टिंग, रिकॉर्ड रखने और अन्य निर्धारित दायित्वों का पालन करना आवश्यक है।

एफआईयू-आईएनडी ने आम जनता को भी सतर्क करते हुए कहा है कि क्रिप्टो उत्पाद और एनएफटी अनियमित हैं तथा इनमें निवेश और लेन-देन अत्यधिक जोखिमपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे लेन-देन से होने वाले नुकसान के लिए किसी नियामक संरक्षण या उपाय की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो सकती।

देवभूमि खबर

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