CBI कोर्ट का बड़ा फैसला: कुशल डायमंड्स लिमिटेड और दो निदेशकों को 5-5 साल की सजा, 90 लाख रुपये का जुर्माना

अहमदाबाद। सीबीआई कोर्ट, अहमदाबाद ने आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के एक मामले में निजी कंपनी मैसर्स कुशल डायमंड्स लिमिटेड, उसके मुख्य प्रबंध निदेशक बकुल जावेरी और निदेशक मझहर एस. कपाड़िया को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।
माननीय न्यायालय ने कुशल डायमंड्स लिमिटेड पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं, कंपनी के मुख्य प्रबंध निदेशक बकुल जावेरी और निदेशक मझहर एस. कपाड़िया को पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास के साथ 30-30 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
सीबीआई ने इस मामले में 15 मार्च 2000 को नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (एनएसआईसी), अहमदाबाद के तत्कालीन अधिकारियों विरेंद्र कुमार साहनी, रोहित ढींगरा और राम अवतार अग्रवाल समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
जांच में आरोप सामने आया कि एनएसआईसी के अधिकारियों ने कुशल डायमंड्स लिमिटेड के निदेशकों के साथ आपराधिक साजिश रचते हुए कंपनी को बिल डिस्काउंटिंग सुविधा और रॉ मैटेरियल असिस्टेंस स्कीम के तहत धनराशि उपलब्ध कराई।
सीबीआई जांच के अनुसार, एनएसआईसी ने कंपनी को कुल 2 करोड़ 34 लाख 85 हजार 81 रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई थी। विभिन्न समायोजनों और भुगतानों के बाद 31 मार्च 1996 तक कंपनी पर 99 लाख 96 हजार 364 रुपये बकाया पाए गए, जिससे एनएसआईसी को नुकसान हुआ।
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 8 जनवरी 2002 को आठ आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। इनमें कुशल डायमंड्स लिमिटेड, उसके तीन निदेशक बकुल जावेरी, मझहर एस. कपाड़िया और सुभाष छनाना तथा एनएसआईसी के चार तत्कालीन अधिकारी शामिल थे।
मुकदमे के दौरान आरोपी निजी व्यक्ति सुभाष छनाना की मृत्यु हो जाने के कारण उनके खिलाफ मामला समाप्त कर दिया गया। वहीं, न्यायालय ने एनएसआईसी के तत्कालीन अधिकारियों विरेंद्र कुमार साहनी, रोहित ढींगरा, राम अवतार अग्रवाल और राजेश अरोड़ा को आरोपों से बरी कर दिया।
सीबीआई कोर्ट के इस फैसले में कंपनी समेत तीन आरोपियों पर कुल 90 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जबकि दो निदेशकों को पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।
