नेक्सा एवरग्रीन निवेश धोखाधड़ी मामले में 2676 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा, 52 करोड़ की संपत्तियां जब्त और कुर्क

जयपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जयपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने नेक्सा एवरग्रीन निवेश धोखाधड़ी मामले में सुभाष चंद्र बिजनोरिया उर्फ सुभाष चंद्र बिजारनिया तथा अन्य आरोपियों और संबंधित संस्थाओं के खिलाफ सात अक्टूबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत जयपुर स्थित विशेष न्यायालय में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। जांच में वर्ष 2019 से 2023 के बीच नेक्सा एवरग्रीन समूह के माध्यम से निवेशकों से लगभग 2676 करोड़ रुपये एकत्र किए जाने का खुलासा हुआ है।
ईडी ने राजस्थान पुलिस द्वारा दर्ज कई प्राथमिकी और दाखिल आरोपपत्रों के आधार पर इस मामले में धन शोधन की जांच शुरू की थी। जांच के अनुसार, आरोपियों ने निवेशकों को गुजरात के धोलेरा स्मार्ट सिटी में भूमि विकास और भूखंड आवंटन परियोजनाओं में निवेश करने का झांसा दिया। निवेशकों को 60 सप्ताह तक प्रत्येक सप्ताह तीन प्रतिशत रिटर्न देने अथवा भूखंड आवंटित करने का आश्वासन दिया गया था। इसके अतिरिक्त, नई निवेशक सदस्यता कराने पर लैपटॉप, मोटरसाइकिल और कार जैसे आकर्षक पुरस्कार देने का लालच भी दिया गया। यह पूरी व्यवस्था बहुस्तरीय रेफरल योजना के तहत संचालित की जा रही थी।
जांच एजेंसी के मुताबिक, जनवरी 2023 में निवेशकों को भुगतान अचानक बंद कर दिया गया। इसके बाद कंपनी की वेबसाइट, मोबाइल एप्लिकेशन और कार्यालय भी बंद कर दिए गए। कंपनी के सॉफ्टवेयर आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया कि 47,664 निवेशकों को उनकी जमा की गई रकम से कम धनराशि वापस मिली। इस प्रकार निवेशकों की कुल 932.54 करोड़ रुपये की राशि का अंतर सामने आया।
ईडी की जांच में आरोप है कि रणवीर सिंह उर्फ रणवीर बिजारनिया और सुभाष चंद्र बिजनोरिया इस कथित धोखाधड़ी के संचालन पर पूरा नियंत्रण रखते थे। निवेशकों से प्राप्त धनराशि के संग्रह, पहले निवेशकों को भुगतान करने और संपत्तियां खरीदने के लिए सहयोगियों तथा निवेशकों के नाम पर कंपनियों, सीमित देयता भागीदारी संस्थाओं, साझेदारी फर्मों और एकल स्वामित्व वाली इकाइयों का जाल खड़ा किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, इन संस्थाओं और उनके बैंक खातों का इस्तेमाल निवेशकों की रकम एकत्र करने, पहले निवेशकों को बाद में आए निवेशकों की रकम से भुगतान करने तथा अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया। इससे कथित अपराध से अर्जित धन के वास्तविक स्रोत और स्वामित्व को छिपाने का प्रयास किया गया।
ईडी ने जून 2025 में धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 17 के तहत जयपुर, सीकर, झुंझुनूं और अहमदाबाद में 25 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस कार्रवाई में 2.05 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए, जबकि बैंक और क्रिप्टो खातों में जमा 15.31 करोड़ रुपये की राशि को फ्रीज किया गया था।
मामले में सुभाष चंद्र बिजनोरिया को 10 अगस्त 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था। वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है।
ईडी ने छह अक्टूबर 2026 के अस्थायी कुर्की आदेश के तहत 69 अचल संपत्तियों तथा 26 बैंक खातों और सावधि जमा में उपलब्ध राशि को भी कुर्क किया है। इनकी कुल कीमत 34.91 करोड़ रुपये बताई गई है। कुर्क की गई संपत्तियों में गुजरात के धोलेरा और धंधुका स्थित जमीन एवं भूखंड, अहमदाबाद और सीकर में आवासीय फ्लैट तथा गोवा के कैलंगुट में स्थित एक रिसॉर्ट कंपनी में 45 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है।
ईडी के अनुसार, इस मामले में अब तक जब्त, फ्रीज और कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 52 करोड़ रुपये हो गया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।


