विकलांग जनों के चेक रोके जाने और विधायकों द्वारा घर से वितरण पर जन संघर्ष मोर्चा का फूटा आक्रोश
विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा के एक प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के नेतृत्व में तहसील विकासनगर पहुंचकर तहसील प्रशासन की संवेदनहीनता और लापरवाही पर तीखा विरोध दर्ज कराया। प्रतिनिधिमंडल अपने साथ एक ही परिवार के तीन पूर्णतः विकलांग जनों को भी साथ लाया, जिन्हें सरकार द्वारा स्वीकृत आर्थिक सहायता के चेक अब तक नहीं दिए गए थे। आरोप है कि छह से सात महीने से यह परिवार चेक के लिए तहसील के चक्कर काट रहा है, लेकिन प्रशासन केवल आश्वासन देकर उन्हें भटका रहा है।
इस दौरान तहसीलदार श्री विवेक राजोरी ने मोर्चा के आक्रोश को देखते हुए आश्वस्त किया कि आचार संहिता समाप्त होते ही लेखपाल के माध्यम से चेक अगले दिन उनके घर भिजवा दिए जाएंगे। मोर्चा अध्यक्ष नेगी ने कहा कि यह आर्थिक सहायता स्वयं मोर्चा द्वारा शासन से मंजूर करवाई गई थी, लेकिन प्रशासन की उपेक्षा के चलते आज तक विकलांग जनों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल प्रशासन की लापरवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी एक गंभीर अनियमितता भी है।
नेगी ने आरोप लगाया कि अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में सत्ताधारी दल के विधायक तहसील कर्मियों पर दबाव बनाकर आर्थिक सहायता के चेक अपने कब्जे में ले लेते हैं और उन्हें अपने घर से वितरित करते हैं। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता का अपमान भी है। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग विधायक के घर जाना नहीं चाहते, और कई बार जाने पर भी विधायक उनसे मिलते नहीं हैं। ऐसे में जरूरतमंदों को सहायता मिल पाना और भी कठिन हो जाता है।
उन्होंने विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर वास्तव में सेवा करनी है तो घर से नहीं, क्षेत्र में घूमकर चेक वितरण करें। केवल 5–10 हजार रुपये के चेक देकर फोटो खिंचवाना और प्रचार करना शर्मनाक है। मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि यह रवैया भविष्य में भी जारी रहा तो तहसील प्रशासन को कुर्सी सहित बाहर कर दिया जाएगा और जनप्रतिनिधियों को भी जनता सबक सिखाएगी।
इस मौके पर मोर्चा टीम में महासचिव आकाश पंवार, विजयराम शर्मा, दिलबाग सिंह, हाजी असद, भीम सिंह बिष्ट, प्रवीण शर्मा पिन्नी, अमित जैन, सुशील भारद्वाज और यूनुस सहित कई अन्य सदस्य मौजूद रहे।

