उत्तराखंड में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को नई रफ्तार, दिसंबर 2026 तक लीगेसी वेस्ट निस्तारण का लक्ष्य सब हेडिंग:

राज्य में प्रतिदिन 1,930 मीट्रिक टन कचरा उत्पादन, 1,800 मीट्रिक टन का हो रहा प्रसंस्करण; 657 नए वाहन खरीदे जाएंगे
देहरादून। सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नए नियमों और उत्तराखंड में इनके प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 01 अप्रैल 2026 से देशभर में लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के तहत राज्य में शहरी एवं ग्रामीण स्थानीय निकायों के स्तर पर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
डॉ. धकाते ने बताया कि नए नियमों में कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ-साथ सर्कुलर इकोनॉमी, स्रोत पर कचरा पृथक्करण, रिसाइक्लिंग और संसाधनों के पुनः उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है। इस अवसर पर सहायक निदेशक पीआईबी देहरादून श्री संजीव सुन्दिरयाल एवं निदेशक शहरी विकास श्री प्रवीण कुमार भी मौजूद रहे।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 के नियमों में कचरा पृथक्करण की तीन श्रेणियां निर्धारित थीं, जबकि नए नियमों में इसे बढ़ाकर चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इनमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा और विशेष देखभाल वाला कचरा शामिल है।
डॉ. धकाते ने बताया कि 2,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल, प्रतिदिन 40 हजार लीटर से अधिक जल खपत अथवा प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थान, यदि इनमें से किसी एक मानक को पूरा करते हैं, तो उन्हें बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे संस्थानों के लिए पंजीकरण के साथ ही कचरे के प्रसंस्करण और रिसाइक्लिंग की जिम्मेदारी भी निर्धारित की गई है।
उन्होंने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के क्रम में प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक जनपद में डिस्ट्रिक्ट स्पेशल सेल गठित किए गए हैं। इन सेल के माध्यम से शहरी एवं ग्रामीण स्थानीय निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, डंपिंग साइट और लीगेसी वेस्ट के निस्तारण की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रदेश में दिसंबर 2026 तक लीगेसी वेस्ट के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है।
डॉ. धकाते के अनुसार वर्तमान में राज्य में लगभग शत-प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण किया जा रहा है। चार श्रेणियों में कचरा पृथक्करण को ध्यान में रखते हुए लगभग 500 वाहनों में चार कम्पार्टमेंट की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही डिजिटल व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम भी लागू किया गया है, जिससे कचरा संग्रहण वाहनों की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि राज्य में प्रतिदिन लगभग 1,930 मीट्रिक टन ठोस कचरा उत्पन्न हो रहा है, जबकि करीब 1,800 मीट्रिक टन कचरे का प्रतिदिन प्रसंस्करण किया जा रहा है। प्लास्टिक कचरे का भी पृथक रूप से प्रसंस्करण किया जा रहा है।
कचरा संग्रहण व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए 657 नए वाहन खरीदे जा रहे हैं, जिनमें लगभग 480 ई-वाहन शामिल हैं। राज्य में वर्तमान में 22 इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, लगभग 50 मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी और 600 से अधिक वेस्ट कम्पोस्टर संचालित किए जा रहे हैं।
इस दौरान अधिकारियों ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के सफल क्रियान्वयन के लिए नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों, जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और आमजन की सामूहिक भागीदारी और जिम्मेदारी अत्यंत आवश्यक है।
