चार करोड़ रुपये की ऋण धोखाधड़ी में दोषी संजीव दीक्षित उर्फ संजय शर्मा पर 1.60 लाख रुपये का जुर्माना

नई दिल्ली। राउज एवेन्यू जिला न्यायालय स्थित सीबीआई अदालत ने चार करोड़ रुपये की बैंक ऋण धोखाधड़ी के मामले में दोषी संजीव दीक्षित उर्फ संजय शर्मा को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर एक लाख 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने 24 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाया।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 11 जुलाई 2013 को इस मामले में संजीव दीक्षित, मेसर्स शंकर मेटल्स के मालिक, संजय शर्मा, मेसर्स सुपर मशीन के मालिक, इंद्रा रानी और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया था। आरोप था कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत फर्जी और जाली संपत्ति दस्तावेजों के आधार पर पंजाब नेशनल बैंक की जोर बाग शाखा, नई दिल्ली से चार करोड़ रुपये की नकद ऋण सुविधा प्राप्त की। इसके बाद ऋण की राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों में किया गया।
मामले में आरोपी संजीव दीक्षित उर्फ संजय शर्मा वर्ष 2016 में सोनीपत की एक अदालत में दूसरे मामले की सुनवाई के दौरान पेशी के समय न्यायिक हिरासत से फरार हो गया था। गिरफ्तारी से बचने पर विचारण न्यायालय ने 23 नवंबर 2017 को उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था।
जनवरी 2026 में सीबीआई को सूचना मिली कि आरोपी गुजरात के वडोदरा में पंकज भारद्वाज, पुत्र बृज मोहन भारद्वाज, की फर्जी पहचान से रह रहा है। सूचना के आधार पर सीबीआई ने उसकी तलाश की और राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के उमराई स्थित माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर से 30 जनवरी 2026 को उसे गिरफ्तार कर लिया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान संजीव दीक्षित उर्फ संजय शर्मा ने आपराधिक साजिश, प्रतिरूपण कर धोखाधड़ी, धोखाधड़ी, मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाजी, धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी तथा जाली दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने सहित विभिन्न अपराधों को स्वीकार कर लिया। इसके बाद अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख 60 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।


