‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ से अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट पर प्रहार, 18 गिरफ्तार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मादक पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के नेतृत्व में चलाए गए ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत 23 अक्टूबर 2026 को असम, मिजोरम और मणिपुर में 38 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई। अभियान में केंद्रीय एजेंसियों और तीनों राज्यों की पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी गिरोह के संचालन तंत्र और वित्तीय नेटवर्क को निशाना बनाया।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि कार्रवाई के दौरान करीब 100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का पता चला है। इसके अलावा 1,424 बैंक खाते फ्रीज किए गए और 17.82 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई। अभियान में 500 डेटोनेटर, 12 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं, जबकि 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने तक सरकार की कार्रवाई जारी रहेगी।
एनसीबी के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान में मिजोरम पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) सहित विभिन्न एजेंसियों ने समन्वित भूमिका निभाई। कई दिनों तक खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, संदिग्ध ठिकानों की पहचान और संयुक्त योजना के बाद एक साथ छापेमारी की गई। कार्रवाई का उद्देश्य केवल मादक पदार्थों की बरामदगी तक सीमित न रहकर तस्करी के लॉजिस्टिक्स केंद्रों, सहयोगियों और अवैध वित्तीय स्रोतों को निशाना बनाना था।
अभियान के तहत मिजोरम की राजधानी आइजॉल, चम्फाई और भारत-म्यांमार सीमा के निकट स्थित जोखॉथर के अलावा मणिपुर के चूड़ाचांदपुर तथा असम के कछार क्षेत्र में भी कार्रवाई की गई। अधिकारियों के अनुसार, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में एक साथ कार्रवाई के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल स्थापित किया गया, ताकि संदिग्धों को भागने और अवैध संपत्तियों को छिपाने का मौका न मिले।
जांच के दौरान म्यांमार से संचालित एक अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह का पता चला, जिस पर मेथामफेटामाइन और हेरोइन की सीमा पार तस्करी करने का आरोप है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह म्यांमार से मिजोरम, मणिपुर, असम और त्रिपुरा के रास्ते भारत के अन्य हिस्सों तथा बांग्लादेश तक तस्करी का नेटवर्क संचालित करता था। इस नेटवर्क के कथित सरगना थांगसिंतुआंग उर्फ चिंतुआंग उर्फ त्लुआंगा को पहले दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था।
जांच के पिछले चरणों में गिरोह के कई अन्य कथित सहयोगियों पर भी कार्रवाई की गई। इनमें म्यांमार से आने वाली खेपों की आवाजाही का समन्वय करने वाला वुंगखानथॉना, कथित हवाला संचालक ललरमपारी और असम क्षेत्र में तस्करी की ढुलाई का समन्वय करने वाला अबू सालेह उर्फ सैफुद्दीन शामिल हैं। जांच एजेंसियों ने वित्तीय लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के जरिए सहयोगियों, मुखौटा कंपनियों तथा धन हस्तांतरण में शामिल बिचौलियों की पहचान की।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संयुक्त अभियान में शामिल केंद्रीय एजेंसियों और तीनों राज्यों की पुलिस टीमों की सराहना की। सरकार के अनुसार, ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ के तहत तस्करी के पूरे नेटवर्क और उसके वित्तीय स्रोतों को ध्वस्त करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार ने 31 दिसंबर 2029 तक देश में मादक पदार्थों के नेटवर्क को समाप्त करने का संकल्प दोहराया है।


